महेंद्र ठाकुर, शिमला

युग हत्याकांड एवं अपहरण मामले में फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद तीनों हत्यारों के चेहरों का रंग उड़ गया है। कंडा जेल में हत्यारों की पहली रात बेचैनी के साथ गुजरी। तीनों ने रात व दोपहर का भोजन भी अन्य दिनों की अपेक्षा कम किया।

जेल अधीक्षक सुशील ने बताया कि फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद तीनों ने रात को कम खाना खाया था। सुबह का नाश्ता भी नाममात्र ही किया। दोपहर का भोजन भी कम लिया। तीनों रात को परेशान थे। उनके मुताबिक जब इस मामले की सुनवाई होती थी तो उससे एक दिन पहले तीनों परेशान हो जाते थे। वैसे कभी कभार तीनों हत्यारे तेजिंद्र पाल सिंह, विक्रांत बख्शी और चंद्र शर्मा के घर से कोई न कोई सदस्य मिलने के लिए पहुंचता था। लेकिन वीरवार को कोई भी मिलने के लिए नहीं पहुंचा। इन्होंने किसी से बात करने की इच्छा भी जाहिर नहीं की।

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रात आठ बजे पहुंचाए जेल

न्यायालय में सजा सुनाए जाने के बाद लोगों के गुस्से की संभावना को देखते हुए तीनों चक्कर न्यायिक परिसर में ही रहे। रात आठ बजे तीनों को कड़ी सुरक्षा के बीच में कंडा जेल पहुंचाया गया। पहले पुलिस ने चक्कर, टुटू व घणाहटटी में पता लगाया कि लोगों का जमावड़ा तो नहीं है। उसके बाद ही पुलिस ने सुरक्षा के पुख्ता बंदोबस्त में मूवमेंट की।

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जैदी, डीएसपी भी कंडा जेल में

सूरज हत्याकांड में न्यायिक हिरासत में चल रहे पूर्व आइजी जहूर हैदर जैदी, डीएसपी मनोज जोशी, कोटखाई के पूर्व एसएचओ राजेंद्र सिंह सहित आठ पुलिस कर्मी भी कंडा जेल में बंद हैं। जबकि शिमला के पूर्व एसपी डीडब्ल्यू नेगी कैथू जेल में बंद हैं।

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बैरक बदली, चोरी के मामले में आज होंगे कोर्ट में पेश

जागरण संवाददाता, शिमला : युग के हत्यारे बुधवार रात कंडा जेल पहुंचे तो पुरानी बैरक में गए। पहले तीनों अलग अलग उन बैरक में रहते थे। जहां पर अंडर ट्रायल के कैदी रहते थे। लेकिन जब शाम को पहुंचे तो कोर्ट इन्हें दोषी करार दे चुका था। जेल प्रबंधन को यह सूचना फैसला सुनाए जाने के तुरंत बाद मिल गई थी। इसलिए तीनों को दोषियों वाली बैरक में शिफ्ट कर दिया। वीरवार को तीनों की चोरी के मामले में भी सुनवाई थी। वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए इनकी पेशी हुई। इस दौरान कोर्ट ने सात सितंबर को तीनों को व्यक्तिगत तौर पर कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया। इस दौरान तीनों दोषियों की आपस में कुछ देर बात हुई। सूत्रों के मुताबिक जिला एवं सत्र न्यायालय के फैसले के खिलाफ तीनों हाईकोर्ट में अपील करने की बात कर रहे थे।

उधर, जेल अधीक्षक सुशील ने बताया कि पहले तीनों कैदियों को अंडर ट्रायल वालों के साथ रखा जाता था। अब सजा हो गई है तो अलग बैरक में शिफ्ट किया गया है।

Posted By: Jagran