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आपदा से निपटेंगे युवा, पंचायतों में मिलेगा प्रशिक्षण

आपदा प्रबंधन से बचाव के लिए अब पंचायतों में युवाओं को प्रशिक्षण मिलेगा। प्रत्येक ग्राम पंचायत में कम से कम दस से पंद्रह युवाओं को प्रशिक्षित किया जाएगा।

By JagranEdited By: Published: Tue, 22 Oct 2019 05:17 PM (IST)Updated: Tue, 22 Oct 2019 05:17 PM (IST)
आपदा से निपटेंगे युवा, पंचायतों में मिलेगा प्रशिक्षण
आपदा से निपटेंगे युवा, पंचायतों में मिलेगा प्रशिक्षण

राज्य ब्यूरो, शिमला : मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि आपदा से बचाव के लिए पंचायतों में युवाओं को प्रशिक्षण मिलेगा। प्रत्येक ग्राम पंचायत में कम से कम 10 से 15 युवाओं को प्रशिक्षित किया जाएगा। पहले चरण में 48,390 युवाओं को बचाव कार्य और पीड़ितों को प्राथमिक उपचार देने का प्रशिक्षण दिया जाएगा। सुरक्षित भवन निर्माण को बढ़ावा देने के लिए 16,130 कारीगरों को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य है।

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मुख्यमंत्री ने मंगलवार को शिमला में हिमाचल प्रदेश, लद्दाख, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर के हितधारकों के लिए 'पहाड़ी शहरों में आपदा जोखिम न्यूनीकरण की चुनौतियां' विषय पर आयोजित दो दिवसीय क्षेत्रीय कार्यशाला की अध्यक्षता की। मुख्यमंत्री ने कहा कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र स्तर तक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए अस्पताल सुरक्षा योजना के अंतर्गत एक योजना बनाई गई है ताकि आपदा की स्थिति में प्रभावी सेवाएं प्रदान की जा सकें। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एसडीएमए) ने पिछले साल असामयिक हिमपात के कारण चंबा, कुल्लू व लाहुल स्पीति जिलों में फंसे 4000 से ज्यादा लोगों को बचाने के लिए ऑपरेशन व्हाइट हिमालय को सफलतापूर्वक अंजाम दिया था।

सरकार ने स्कूल सुरक्षा परियोजना को भी मंजूरी दी है। इसके अंतर्गत आपदा प्रबंधन योजना तैयार कर शिक्षण संस्थानों में मॉक ड्रिल आयोजित की जाएगी। उन्होंने एसडीएमए द्वारा तैयार स्कूल प्रबंधन के दिशानिर्देशों पर एक पुस्तिका और आपदा प्रबंधन व सुरक्षित निर्माण प्रथाओं पर दो वीडियो जारी किए। भवन निर्माण में पारंपरिक तकनीक अपनाएं : सरवीण चौधरी

शहरी विकास, आवास और नगर नियोजन मंत्री सरवीण चौधरी ने पहाड़ी राज्यों में भवन निर्माण में पारंपरिक तकनीक अपनाने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार नक्शों के अनुसार गृह निर्माण को प्रोत्साहित कर रही है। आवेदन के एक माह के भीतर मंजूरी दी जा रही है। उन्होंने जनता से आग्रह किया कि भवनों का निर्माण नियमानुसार करें ताकि प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान को कम किया जा सके। मलबे का हो वैज्ञानिक प्रबंधन : बाल्दी

मुख्य सचिव डॉ. श्रीकांत बाल्दी ने कहा कि सचिवालय, उपायुक्त कार्यालयों, दमकल केंद्रों, पुलिस थानों, दूरसंचार नेटवर्क, महत्वपूर्ण पुलों और पानी के टैंकों जैसे जीवनरेखा भवनों को मजबूत बनाने की जरूरत है। ऐसा करने पर प्राकृतिक आपदा की स्थिति में तत्काल राहत प्रदान की जा सकेगी। उन्होंने सड़क और अन्य बुनियादी ढांचों के निर्माण के कारण निकलने वाले मलबे के वैज्ञानिक प्रबंधन पर भी बल दिया। इन्होंने भी रखे विचार

राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) के सदस्य कमल किशोर ने कहा कि विकास कार्य इस प्रकार हों कि उनसे आपदाओं का खतरा न बढ़े। राजस्व विभाग के प्रमुख सचिव ओंकार शर्मा ने कहा कि एनडीएमए की हिमालयी राज्यों में महत्वपूर्ण भूमिका है क्योंकि ये राज्य अधिकतम प्राकृतिक आपदाओं के शिकार बनते हैं।

आइआइटी मुंबई के प्रोफेसर और महाराष्ट्र आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सदस्य प्रो. रवि कुमार सिन्हा ने पहाड़ी राज्यों में आपदा जोखिम प्रबंधन और हिमाचल में भूकंप के जोखिम पर प्रस्तुति दी। राजस्व-आपदा प्रबंधन के निदेशक एवं विशेष सचिव डीसी राणा ने कहा कि कि प्राधिकरण का प्रयास सुरक्षा की संस्कृति का निर्माण करना है। ये रहे उपस्थित

कार्यशाला में सचिव शहरी विकास सी पालरासु, शिमला और मंडी के उपायुक्त, एनजीआरआइ हैदराबाद, जीएसआइ चंडीगढ़, एनआइटी हमीरपुर, आइएमडी नई दिल्ली जैसे कई संस्थानों के प्रतिनिधि, वैज्ञानिक और राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के प्रमुख वैज्ञानिक उपस्थित थे।


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