विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

मोबाइल और बिगड़ती दिनचर्या बना रही दिमाग को बीमार, कतई नजरअंदाज न करें सिरदर्द व कमजोरी सहित ये लक्षण

By Chaitanya Thakur Edited By: Rajesh Sharma
Published: Mon, 08 Jun 2026 06:15 AM (IST)Updated: Mon, 08 Jun 2026 10:52 AM (IST)

हिमाचल में मोबाइल के अत्यधिक उपयोग, तनाव और अनियमित जीवनशैली के कारण मस्तिष्क संबंधी बीमारियां बढ़ रही हैं, जिनमें ब्रेन ट्यूमर, स्ट्रोक और माइग्रेन प्रमुख हैं।

मोबाइल की बहुत ज्यादा लत भी दिमाग को बीमार बना रही है। प्रतीकात्मक फोटो

मोबाइल की बहुत ज्यादा लत भी दिमाग को बीमार बना रही है। प्रतीकात्मक फोटो

HighLights

  1. आधुनिक जीवनशैली से हिमाचल में बढ़ रहे मस्तिष्क रोग।

  2. ब्रेन ट्यूमर, स्ट्रोक, माइग्रेन जैसे न्यूरोलॉजिकल मामले सामने।

  3. लगातार सिरदर्द, याददाश्त कमजोरी जैसे लक्षणों को न करें अनदेखा।

जागरण संवाददाता, शिमला। घंटों मोबाइल और डिजिटल स्क्रीन के सामने बिताया जाने वाला समय, बढ़ता मानसिक तनाव, अनियमित दिनचर्या और शारीरिक गतिविधियों में कमी अब लोगों के मस्तिष्क स्वास्थ्य पर भी असर डालने लगी है। हिमाचल में ब्रेन ट्यूमर, ब्रेन स्ट्रोक, माइग्रेन, मिर्गी, पार्किंसन और डिमेंशिया जैसे न्यूरोलॉजिकल रोगों के मामले सामने आ रहे हैं। विश्व ब्रेन ट्यूमर दिवस के अवसर पर स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि आधुनिक जीवनशैली से जुड़ी आदतें मस्तिष्क संबंधी बीमारियों के खतरे को बढ़ा रही हैं और समय रहते लक्षणों की पहचान बेहद जरूरी है।

शिमला स्थित आईजीएमसी के न्यूरोलॉजी एवं न्यूरोसर्जरी विभाग में प्रदेश के विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में मरीज उपचार के लिए पहुंच रहे हैं।

विशेषज्ञ डा. व न्यूरो सर्जन प्रोफेसर डा. ज्ञान चंद के अनुसार युवाओं में माइग्रेन, तनावजनित सिरदर्द और मिर्गी के मामले बढ़ रहे हैं, जबकि बुजुर्गों में डिमेंशिया, अल्जाइमर, पार्किंसन और ब्रेन स्ट्रोक जैसी समस्याएं अधिक देखने को मिल रही हैं।

नजरअंदाज न करें ये लक्षण

चिकित्सकों का कहना है कि लगातार सिरदर्द, चक्कर आना, याददाश्त कमजोर होना, बोलने में कठिनाई, दौरे पड़ना, शरीर के किसी हिस्से में कमजोरी या व्यवहार में बदलाव जैसे लक्षणों को सामान्य समस्या समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। कई बार यही संकेत गंभीर मस्तिष्क रोगों की शुरुआती चेतावनी साबित होते हैं।

ये चीजें डाल रहीं नकारात्मक प्रभाव

विशेषज्ञों के अनुसार लंबे समय तक मोबाइल और डिजिटल स्क्रीन का अत्यधिक उपयोग, तनावपूर्ण जीवनशैली, नींद की कमी और व्यायाम से दूरी मस्तिष्क पर नकारात्मक प्रभाव डाल रही है। इसके साथ ही उच्च रक्तचाप, मधुमेह और नशे की आदतें भी न्यूरोलॉजिकल बीमारियों के जोखिम को बढ़ा रही हैं।

हालांकि आधुनिक एमआरआई और अन्य जांच सुविधाओं के कारण अब कई रोगों की पहचान शुरुआती चरण में संभव हो रही है, जिससे उपचार की सफलता की संभावना बढ़ जाती है।

विशेषज्ञों की क्या है सलाह

विश्व ब्रेन ट्यूमर दिवस पर स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों से संतुलित आहार अपनाने, नियमित व्यायाम करने, पर्याप्त नींद लेने और तनाव को नियंत्रित रखने की अपील की है। उनका कहना है कि स्वस्थ जीवनशैली और समय पर जांच ही मस्तिष्क संबंधी गंभीर बीमारियों से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है।

किन आयु वर्गों में बढ़ रहे हैं मस्तिष्क रोग?

  • 20-40 वर्ष: माइग्रेन, तनावजनित सिरदर्द, मिर्गी
  • 40-60 वर्ष: ब्रेन स्ट्रोक, उच्च रक्तचाप व मधुमेह से जुड़ी मस्तिष्क समस्याएं
  • 60 वर्ष से अधिक: डिमेंशिया, अल्जाइमर, पार्किंसन और स्ट्रोक

इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज

  • लगातार सिरदर्द
  • दौरे पड़ना
  • धुंधला दिखाई देना
  • याददाश्त कमजोर होना
  • बोलने में परेशानी
  • शरीर के किसी हिस्से में कमजोरी
  • व्यवहार में बदलाव

यह भी पढ़ें: ढली-रामपुर फोरलेन का सर्वेक्षण पूरा, सुक्खू बोले- टनल निर्माण पर रहेगा जोर; निर्विरोध चुनी नगर पंचायत को 50 लाख रुपये