शिमला शहर को स्मार्ट बनाने के लिए चल रहे स्मार्ट सिटी के प्रोजेक्ट अब जल्द ही लोगों को जमीन पर नजर आने शुरू हो जाएंगे। स्मार्ट सिटी के 450 करोड़ रुपये के प्रोजक्ट मंजूर हो चुके हैं। 130 करोड़ के आठ प्रोजेक्टों को प्रशासनिक मंजूरी भी मिल चुकी है। प्रोजेक्टों को अमलीजामा पहनाने का प्रयास किया जा रहा है। वास्तव में स्मार्ट सिटी मंजिल नहीं, रास्ता है शहर में विकास कार्यो को गति देने का। यह प्रोजेक्ट काफी बड़ा है और भारत में नया है। शिमला शहर की भौगोलिक परिस्थितियों के अनुसार इस काम को गति दी जा रही है। इस संबंध में तारा चंद ने स्मार्ट सिटी के महाप्रबंधक (टेक्नीकल) नितिन गर्ग से बातचीत की। पेश हैं बातचीत के कुछ अंश।

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-शिमला में स्मार्ट सिटी का काम कब तक जमीन पर दिखना शुरू हो जाएगा?

शिमला में स्मार्ट सिटी के कामों में काफी तेजी आई है। स्मार्ट सिटी के अधिकांश कार्य टेंडरिग स्टेज पर हैं। 14 विभाग स्मार्ट सिटी के तहत काम कर रहे हैं और 28 फरवरी तक अधिकांश विभाग कार्य की टेंडर प्रक्रिया आरंभ कर देंगे। इसके बाद काम शुरू कर दिए जाएंगे और जल्द ही लोगों को इसका लाभ भी मिलना शुरू हो जाएगा।

-स्मार्ट सिटी के कितने प्रोजेक्ट हैं और कितनों की डीपीआर तैयार हो चुकी है?

स्मार्ट सिटी के तहत 28 प्रोजेक्ट शिमला में पहले चरण में शुरू किए जाने हैं। 450 करोड़ रुपये के 28 प्रोजेक्टों को बीओडी (बोर्ड ऑफ डायरेक्टर) की मंजूरी भी मिल चुकी है। 130 करोड़ के आठ प्रोजेक्टों को प्रशासनिक मंजूरी मिल गई है। विभागों को निर्देश दिए हैं कि कामों में तेजी लाएं और प्रोजेक्टों को टाइमलाइन के अंदर पूरा करें।

-इस वित्त वर्ष के लिए क्या लक्ष्य रखा गया है?

प्रोजेक्ट में काफी बड़ी चुनौतियां हैं। पुणे जैसे बड़े शहर के ठेकेदार भी शिमला में नहीं हैं। बड़े कामों के लिए ठेकेदार आते हैं या नहीं यह भी एक बड़ी चुनौती है। बावजूद इसके लक्ष्य रहेगा कि सभी प्रोजेक्टों को अमलीजामा पहनाया जाए।

-प्रोजेक्ट की क्या खासियत रहेगी?

प्रोजेक्ट के तहत सभी काम स्मार्ट तरीके से किए जाएंगे। किसी भी प्रोजेक्ट के तहत शहर की हैरीटेज लुक को नहीं खोने दिया जाएगा। ऐतिहासिक भवनों और ऐतिहासिक धरोहरों के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं की जाएगी। दूसरा, लोगों की सहभागिता से ही सभी काम किए जाएंगे। इसके अलावा पर्यावरण से किसी तरह का खिलवाड़ प्रोजेक्ट के तहत नहीं किया जाएगा। यहां तक कि जो भी काम होगा वह पेपरलैस होगा और सभी रिपो‌र्ट्स पीडीएफ फार्मेट में तैयार की जाएगी, ताकि कागज का इस्तेमाल कम हो सके।

-केंद्रीय मंत्रालय द्वारा किए गए आंतरिक सर्वे में शिमला को धीमा करार दिया गया है। क्यों?

स्मार्ट सिटी शिमला में कार्य धीमा नहीं है। पहली बात तो यह कि इसे तीसरे राउंड में स्मार्ट सिटी का दर्जा मिला है। दूसरा, यहां पर एनजीटी के आदेशों के कारण भी काम में देरी हुई है। अभी भी एनजीटी के आदेशों से बाहर नहीं निकल पाए हैं। अब शहर में कार्यान्वित किए जा रहे प्रोजेक्ट एनजीटी को ध्यान में रखते हुए बनाए गए हैं।

-निगम आयुक्त दिल्ली गए थे, केंद्रीय मंत्रालय से क्या आदेश मिले हैं?

दिल्ली में निगम आयुक्त ने निदेशक स्मार्ट सिटी मिशन भारत सरकार राहुल कपूर को प्रोजेक्ट की प्रेजेंटेशन दी है। कुछ सुझाव भी दिए हैं। स्मार्ट सिटी रांची के साथ निगम सुझाव साझा करेगा। क्या काम करना है क्या नहीं करना है, इस पर रांची से अब राय ली जाएगी। रांची व शिमला में बहुत से काम समानांतर है। रांची जो प्रोजेक्ट पूरे कर चुका है शिमला भी उसमें रांची से सुझाव लेगा।

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