राज्य ब्यूरो, शिमला : राजधानी शिमला में लोगों की प्यास अब सतलुज नदी से बुझेगी। शिमला का वीआइपी एरिया हो या सामान्य क्षेत्र, लोगों को 24 घंटे पानी मिलेगा। शिमला शहर के उपनगरों में भी पेयजल संकट खत्म होगा। सतलुज नदी से शिमला शहर में पेयजल पहुंचाने का रास्ता साफ हो गया है। विश्व बैंक की टीम पेयजल परियोजना से जुड़ी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) से संतुष्ट होकर वापस लौट गई है।

930 करोड़ रुपये की परियोजना में पेयजल के साथ सीवरेज व्यवस्था भी शामिल है। डीपीआर के प्रत्येक पक्ष से संतुष्ट होने के बाद विश्व बैंक ने सरकार को अक्टूबर में निविदा करने की इजाजत प्रदान की है। छह महीने के भीतर इस परियोजना पर काम शुरू होगा। तीन साल में परियोजना तैयार होगी। परियोजना के तहत न सिर्फ शिमला को पानी पहुंचाया जाएगा बल्कि राज्य मुख्यालय की तीन दशक पुरानी पेयजल समस्या के निवारण के लिए पाइपलाइन बदलने के साथ सीवरेज नेटवर्क भी स्थापित होगा। शहर के प्रत्येक घर को सीवरेज प्रणाली से जोड़ा जाएगा। 2050 तक की जनसंख्या के अनुमान पर योजना का प्रारूप

शिमला जल प्रबंधन निगम के प्रबंध निदेशक अभियंता धर्मेद्र गिल ने बताया कि विश्व बैंक से जुड़ी परियोजना की सभी औपचारिकताएं पूरी हो चुकी हैं। वर्ष 2050 तक शहर की जनसंख्या के अनुमान को लेकर योजना का प्रारूप तैयार किया गया है। तब तक शहर में 107 मिलियन लीटर पर डे (एमएलडी) पानी की जरूरत होगी। अभी शिमला की पेयजल योजनाओं से शहर को 40 एमएलडी पानी मिलता है। शहर की जनसंख्या बढ़ने के कारण पेयजल संकट समस्या बन चुका है। इस कारण सरकार ने विश्व बैंक वित्त पोषित परियोजना तैयार की। इसके तहत सुन्नी के नजदीक शकरोड़ी के पास से शिमला के लिए सतलुज से पानी लिफ्ट किया जाएगा। योजना से शहर को रोजाना करीब 70 एमएलडी पानी मिलेगा। नए सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट बनेंगे

सतलुज से शिमला तक पानी पहुंचाने पर करीब 325 करोड़ रुपये खर्च होंगे। शहर के पेयजल वितरण नेटवर्क को मजबूत करने तथा शिमला व इसके आसपास के विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण (साडा) इलाकों को भी पानी देने के मकसद से पाइपों को बिछाया जाएगा। शहर में सीवरेज नेटवर्क को मजबूत कर नए सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट भी बनाए जाने हैं।

Posted By: Jagran