जागरण संवाददाता, शिमला : राजधानी शिमला में बीपीएल परिवारों के कार्ड बनाने के लिए नगर निगम की बैठक में हंगामा होने के बाद पार्षदों ने वार्ड सभा करवाने का शेड्यूल बनाना शुरू कर दिया है। इसके तहत बुधवार यानी पहली दिसंबर को टुटू वार्ड में सभा की जाएगी। इसमें कौन नए लोग पात्र हो सकते हैं, इनका चयन किया जाना है। पहले चयनित लोग जो अब आय सीमा से बाहर हो चुके हैं उनका नाम इन सूचियों से बाहर किया जाएगा।

सोमवार को नगर निगम की बैठक में इस मसले पर काफी हंगामा हुआ है। इसमें पार्षदों का तर्क है कि आय सीमा का प्रमाणपत्र देने का अधिकार उनके क्षेत्र में नहीं है। इसलिए यदि लोग राजस्व अधिकारियों के प्रमाण पत्र लेकर आते हैं तो वार्ड सभा में इनका चयन किया जा सकता है। इससे आने वाले समय में कोर्ट में चैलेंज हो सकते हैं। इससे पार्षदों व नगर निगम से लेकर अन्य सभी को परेशानी की आशंका बनी रहेगी। इसे खत्म करने के लिए निगम प्रशासन से इसका पूरा एक सिस्टम बनाने के लिए कहा था। इस पर अब निगम प्रशासन ने साफ कर दिया था कि सभी पार्षद अपने स्तर पर चयन करने के बजाय पटवारी की रिपोर्ट के आधार पर चयन करें। चयन का अंतिम फैसला भी वार्ड सभा में लें। इसके बाद ही फाइनल किया जाए। वार्ड सभा में ही किसे शामिल या बाहर करना है, इस पर आपत्तियां भी कम रहेंगी।

नगर निगम के आयुक्त आशीष कोहली ने कहा कि सभी पार्षदों को कहा गया है कि अपने वार्ड में सभा का आयोजन कर इनका चयन करें। इससे सही आदमी का चयन करने में उन्हें भी मदद मिलेगी। टुटू वार्ड के पार्षद विवेक शर्मा ने कहा कि बुधवार को वार्ड सभा का आयोजन होगा। इसमें बीपीएल के पात्र लोगों का चयन करने के एजेंडे पर चर्चा की जानी प्रस्तावित है। 2007 में किया गया था चयन

राजधानी शिमला में 2007 में इनका चयन किया गया था। इसके बाद से इनका चयन नहीं हो पाया है। दो साल पहले नगर निगम प्रशासन की ओर से इसके चयन की प्रक्रिया का फैसला लिया गया था। तब से लेकर अभी तक ये विवादों में चलता आ रहा है। इसका बेहतर तरीके से चयन नहीं हो पा रहा है।

तीन हजार लोग थे सूची में शामिल

शहर में बीपीएल परिवारों की सूची 2007 में तैयार की गई थी। इसमें तीन हजार लोगों के नाम शामिल किए गए थे। निगम प्रशासन ने दो साल पहले ये मानकर काम शुरू किया था कि 14 साल में कुछ परिवार इस सूची से बाहर होंगे, वहीं कुछ ऐसे होंगे जिन्हें जरूरत होगी, लेकिन वे इसके लाभ से वंचित होंगे। इसलिए प्रशासन ने ये पहल शुरू की थी।

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