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विक्रमादित्य ने वीरभद्र के नाम पर नई पार्टी बनाने का किया विरोध, कंगना पर भी किया पलटवार; बोले- हिमाचल की उपलब्धि भी देखिए

Published: Fri, 09 Oct 2026 08:44 PM (IST)

लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के नाम पर नई पार्टी बनाने का विरोध किया है, ...और पढ़ें

शिमला में प्रेस कॉन्फ्रेंस करते विक्रमादित्य सिंह। फोटो जागरण

शिमला में प्रेस कॉन्फ्रेंस करते विक्रमादित्य सिंह। फोटो जागरण

HighLights

  1. वीरभद्र सिंह के नाम पर नई पार्टी का विक्रमादित्य ने किया विरोध।

  2. कंगना रनौत के हिमाचल संबंधी बयान को अनुचित ठहराया।

  3. हिमाचल में 340 सड़कों के लिए 3000 करोड़ रुपये खर्च होंगे।

राज्य ब्यूरो, शिमला। हिमाचल में पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की राजनीतिक विरासत के नाम पर नई पार्टी बनाने की चर्चाओं ने सियासी पारा चढ़ा दिया है। पूर्व सांसद प्रतिभा सिंह के बाद लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने साफ कर दिया है कि विचारधारा के आधार पर राजनीतिक दल बनाने का अधिकार सबको है, लेकिन वीरभद्र सिंह के नाम का इस्तेमाल परिवार की सहमति के बिना नहीं होना चाहिए।

उन्होंने स्पष्ट तौर पर कहा कि वीरभद्र कांंग्रेस के सच्चे सिपाही रहे और जीवनभर कांग्रेस को मजबूत करने और हिमाचल के विकास के लिए काम किया। कांग्रेस को मजबूत किया जाएगा तोड़ने का काम नहीं।चुनाव आयोग से भी आग्रह किया कि परिवार की सहमति के बिना उनके नाम पर किसी राजनीतिक दल का पंजीकरण न किया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह वीरभद्र सिंह के नाम पर पार्टी बनाए जाने का विरोध करेंगे।

लोगों के दिलों में वीरभद्र सिंह

विक्रमादित्य सिंह ने रोहड़ू में कार्यक्रम के दौरान पोस्टर से वीरभद्र की फोटो गायब होने और उनके नाम का जिक्र न होने को लेकर कहा कि तस्वीर होने या न होने से ज्यादा मायने लोगों के दिलों में जगह बनाने की है। वीरभद्र सिंह ने अपने कार्यों से प्रदेशवासियों के दिलों में स्थान बनाया है।

उन्होंने प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री डा. वाईएस परमार और ठाकुर रामलाल और वीरभद्र सिंह के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि हिमाचल के निर्माण और विकास में योगदान देने वाले नेताओं का सम्मान होना चाहिए। सरकारें आती-जाती रहती हैं, लेकिन उनका योगदान भुलाया नहीं जा सकता।

कंगना अपने ही प्रदेश को छोटा न दिखाएं

सांसद कंगना रनौत के हिमाचल को केंद्र पर बोझ बताने संबंधी बयान पर विक्रमादित्य ने तीखा एतराज जताया। उन्होंने कहा कि राजनीतिक विचारधारा अलग हो सकती है, लेकिन अपने ही राज्य को छोटा दिखाना उचित नहीं है।

हिमाचल ने राज्य गठन के बाद शिक्षा, प्रति व्यक्ति आय और सामाजिक सुरक्षा सहित कई क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति की है। जनप्रतिनिधियों को प्रदेश की उपलब्धियों को नजरअंदाज करने की अपेक्षा उनका सम्मान करना चाहिए। राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन प्रदेश के सम्मान से समझौता नहीं होना चाहिए।

340 सड़कों पर खर्च होंगे 3000 करोड़

लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई-4) के दूसरे चरण में प्रदेश की 340 सड़कों के उन्नयन और चौड़ा किए जाने पर करीब 3000 करोड़ रुपये खर्च होने की उम्मीद है। इससे लगभग 1659 किलोमीटर सड़क नेटवर्क का लाभ नवंबर के पहले या दूसरे सप्ताह तक केंद्र से औपचारिक मंजूरी मिलने की संभावना है।

इससे पहले पहले बैच में 294 सड़कों के लिए करीब 2300 करोड़ रुपये स्वीकृत हुए थे। हालांकि, इन कार्यों में 17 सड़क परियोजनाओं के टेंडर न्यायालय में विचाराधीन होने के कारण अटके हैं। वार्षिक रखरखाव योजना के तहत 800 किलोमीटर सड़कों की मेटलिंग और टारिंग का लक्ष्य है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बिटुमेन की आपूर्ति प्रभावित होने से काम में देरी की आशंका है। सरकार इस मुद्दे को केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्रालय के समक्ष उठाएगी और राहत की मांग करेगी।उन्होंने अपने विदेश दौरे के बारे में जानकारी साझा की।