'मनी लॉन्ड्रिंग में फंस...', कांगड़ा में बुजुर्ग को एक महीने तक रखा डिजिटल अरेस्ट; 1 करोड़ 78 लाख की ठगी
कांगड़ा के एक 64 वर्षीय व्यक्ति को साइबर ठगों ने मनी लॉन्ड्रिंग का डर दिखाकर करीब एक महीने तक कथित डिजिटल कैद में रखा और 1.78 करोड़ रुपये ठग लिए।
-1789319765736_m.webp)
कांगड़ा में बुजुर्ग को एक महीने तक रखा डिजिटल अरेस्ट। सांकेतिक फोटो
HighLights
कांगड़ा के व्यक्ति से मनी लॉन्ड्रिंग के नाम पर ठगी।
साइबर ठगों ने 1.78 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की।
टेलीकॉम कर्मचारी और पुलिस अधिकारी बनकर डराया गया।
जागरण संवाददाता, शिमला। ‘तुम मनी लॉन्ड्रिंग में फंस चुके हो… 70 लाख रुपये दो, मामला खत्म करा देंगे।’ इस एक धमकी से शुरू हुआ साइबर ठगों का खेल कांगड़ा के 64 वर्षीय व्यक्ति को करीब एक महीने तक कथित डिजिटल कैद में रखकर चलता रहा।
कभी टेलीकॉम कंपनी का कर्मचारी तो कभी पुलिस अधिकारी बनकर सामने आए ठगों ने 6.8 करोड़ रुपये के कथित मनी लॉन्ड्रिंग लेन-देन का डर दिखाया और गिरफ्तारी का डर पैदा किया। इसके बाद अलग-अलग बैंक खातों में रकम ट्रांसफर करवाई गई।
मामला इतना बढ़ा कि पीड़ित से सोना गिरवी रखने, उसकी ऋण रसीद देने और संपत्ति के दस्तावेज तथा वाहन का पंजीकरण प्रमाणपत्र तक हासिल करने की कोशिश हुई। एफआईआर में कुल 1,78,71,812 रुपये की रकम का उल्लेख है। साइबर अपराध पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एफआईआर दर्ज कर तफ्तीश शुरू कर दी है।
बैंक खाते का इस्तेमाल मनी लॉन्ड्रिंग में
एफआईआर के अनुसार, बांदला निवासी सुरेश कुमार को 30 जुलाई 2026 को फोन आया। फोन करने वाले ने खुद को दिल्ली की एक दूरसंचार कंपनी का कर्मचारी बताया और दावा किया कि सुरेश कुमार के आधार तथा बैंक खाते का इस्तेमाल मनी लॉन्ड्रिंग में हुआ है।
उसके नाम से आईसीआईसीआई बैंक के खाते में करीब 6.8 करोड़ रुपये के लेन-देन का हवाला देकर गिरफ्तारी वारंट जारी होने की बात कही गई।
इसके बाद कथित ठगों ने खुद को पुलिस अफसर बताकर डर का खेल तेज कर दिया। पीड़ित को गंभीर कानूनी कार्रवाई की धमकी दी गई और कथित तौर पर 70 लाख रुपये कमीशन देने पर जांच में राहत व मामला खत्म कराने का भरोसा दिया गया।
हर एक-दो घंटे में देना पड़ता था हिसाब
आरोप है कि इसके बाद पीड़ित को लगातार फोन पर निर्देश दिए जाते रहे। उससे यात्रा का पूरा ब्योरा, मोबाइल रिकॉर्ड, बैंक खातों और आर्थिक लेन-देन की जानकारी मांगी गई। उसे हर एक-दो घंटे में अपनी गतिविधियों की जानकारी देने के लिए कहा गया। यानी ठगों ने डर के जरिए उसे लगातार अपनी निगरानी में होने का एहसास कराया।
एक खाते से दूसरे खाते में पहुंचती रही रकम
एफआईआर में भारतीय स्टेट बैंक, हिमाचल ग्रामीण बैंक की बांदला शाखा, पंजाब नेशनल बैंक, शांति क्रेडिट सहकारी सोसायटी और यूको बैंक समेत विभिन्न बैंक खातों में किए गए लेन-देन का उल्लेख है। शिकायतकर्ता ने पुलिस को संबंधित खातों और यूटीआर संबंधी जानकारी भी उपलब्ध कराई है।
बैंक से आगे सोने पर नजर
ठगों का दबाव यहीं नहीं रुका। एफआईआर के मुताबिक पीड़ित से सोने के बिल और जीएसटी संबंधी दस्तावेज मांगे गए। बिल नहीं होने पर उसे सोना गिरवी रखने और उसके बदले मिली ऋण रसीद उपलब्ध कराने के लिए कहा गया। इसके बाद भी बैंक खातों में रकम भेजने के निर्देश जारी रहे।
26 अगस्त को आरोपितों ने संपत्ति के दस्तावेज और वाहन का पंजीकरण प्रमाणपत्र भी मांगा। 27 अगस्त को दस्तावेज उपलब्ध करवाने के बाद पीड़ित को कथित तौर पर बताया गया कि अब वह “सुरक्षित” है।
लेकिन 28 अगस्त की सुबह आरोपितों से संपर्क टूट गया। इसके बाद पीड़ित को समझ आया कि वह कथित तौर पर साइबर ठगी का शिकार हो चुका है।
