राज्य ब्यूरो, शिमला : औषधीय पौधों के संरक्षण व विकास को लेकर वन अधिकारियों का सात दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम सोमवार को शिमला में शुरू हुआ। इसमें 13 राज्यों के भारतीय वन सेवा (आइएफएस) के 25 अधिकारी शिरकत कर रहे हैं।

हिमालयन वन अनुसंधान संस्थान द्वारा आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ पीसीसीएफ अजय कुमार ने किया। उन्होंने कहा कि भारत में चिकित्सा क्षेत्र में औषधीय पौधों की जानकारी वैदिक काल से ही परंपरागत रूप से चली आ रही है। औषधीय फसलों का उपयोग विभिन्न बीमारियों के इलाज में होता है। इनकी खेती से किसान आर्थिक लाभ भी अर्जित कर रहे हैं। विश्व की काफी आबादी अच्छे स्वास्थ्य के लिए हर्बल उत्पादों का प्रयोग कर रही है। सौंदर्य प्रसाधन व खाद्य पदार्थो में इनका उपयोग होता है। विश्व व्यापार में हर्बल उत्पादों के बढ़ने के कारण औषधीय फसलों की खेती की ओर लोगों में झुकाव बढ़ा है। वनों से प्राप्त औषधीय पौधों के अत्यधिक व अवैज्ञानिक दोहन और राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार बढ़ती माग के कारण इनकी उपलब्धता कम हो रही है। इस संपदा को बचाए रखने के लिए इसके संरक्षण की आवश्यकता है। इनकी व्यावसायिक खेती द्वारा राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर माग की आपूर्ति की जा सकती है।

Posted By: Jagran