शिमला, राज्य ब्यूरो। राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) ने सुरक्षा की दृष्टि से भवनों के नियमितीकरण पर सवाल खड़ा किया है। लेकिन आइआइटी मुंबई व चेन्नेई द्वारा किए गए अध्ययन ने चौंका दिया है। यदि हिमाचल में आठ रिक्टर स्केल का भूकंप आया तो प्रदेश के विभिन्न भागों में 1.88 लाख लोगों की मौत हो सकती है। भूंकप से होने वाली तबाही में 14 लाख लोग घायल होंगे।

राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के तत्वाधान में अध्ययन करवाया गया है। अध्ययन रिपोर्ट आने के पांच वर्ष गुजर जाने के बाद प्रदेश सरकार ने अस्पताल सुरक्षा योजना अधिसूचित की है। इसके मुताबिक प्रदेश के अस्पताल भूकंप की आपदा का सामना करने के लिए तैयार हैं या नहीं, इसका भी किसी को पता नहीं है। अस्पताल की इमारतों का स्ट्रक्चरल ऑडिट अगले वर्ष 2019 में शुरू होगा। भूकंप की दृष्टि से प्रदेश जोन पांच की संवेदशीलता में आता है। वर्ष 2013 में राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने देश की दो आइआइटी के तकनीकी सहयोग से अध्ययन करवाया था। राजस्व विभाग ने अस्पतालों व मेडिकल कॉलेजों में आपदा प्रबंधन को लागू करने के मकसद से तैयार किए दिशानिर्देशों को राज्यपाल की मंजूरी प्राप्त हो गई है।

राजस्व विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव मनीषा नंदा ने दिशानिर्देशों में कहा कि साल 2011 की जनगणना के हिसाब से प्रदेश में आठ की तीव्रता का भूकंप आने की स्थिति में एक लाख 88 हजार से अधिक लोगों की जान जा सकती है। भूकंप से 14 लाख लोग घायल हो सकते हैं। ऐसे में अस्पतालों में घायलों के इलाज के लिए ठोस प्रबंध होने जरूरी हैं। क्या हमारे अस्पताल भवन सुरक्षित हैं या नहीं, इसका पता लगाने के लिए अस्पताल की इमारतों का स्ट्रक्चरल ऑडिट होगा। अस्पताल सुरक्षा योजना सरकार ने अस्पताल सुरक्षा योजना अधिसूचित की है। इसके तहत प्रदेश के सभी जिलों में मेडिकल कॉलेजों से लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर स्ट्रक्चरल ऑडिट लागू किया जाना है।  

दो चरणों में लागू होने वाली इस योजना के तहत न सिर्फ स्वास्थ्य संस्थानों की इमारत का स्ट्रक्चरल ऑडिट होगा बल्कि अस्पतालों में पहुंचने वाले घायलों को मिलने वाली सुविधाओं का अध्ययन होगा। पहले चरण में अगले वर्ष 2019 तक प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों तथा दूसरे चरण में 2020 तक सभी जोनल अस्पतालों में स्ट्रक्चरल ऑडिट के अलावा अन्य बंदोबस्तों को जाचा जा सकेगा।

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