जागरण संवाददाता, शिमला : राष्ट्रपति राम नाथ कोविन्द के स्वागत के लिए शिमला को वीरवार को पूरी तरह से तैयार किया गया। अंग्रेजों के शासनकाल से ही रिज व मालरोड को पानी से धोया जाता था। राष्ट्रपति के शिमला आगमन पर भी इसकी धुलाई करवाई गई। इसके लिए नगर निगम के मुख्य चिकित्सा अधिकारी सहित उनकी स्वास्थ्य शाखा का स्टाफ मौके पर मौजूद रहा।

शहर में मालरोड से होते हुए राष्ट्रपति का काफिला गुजरेगा, इसलिए दुकानों के बाहर लगे सामान को उठाया गया। निगम के वाहन स्टेट ब्रांच के कर्मचारियों के साथ पहली बार मालरोड पर दुकानों के बाहर लगे सामान को जब्त करते दिखे। दुकानों के बाहर रखे टेबल, बच्चों की साइकिल, छातों से लेकर अन्य सभी तरह का सामान जब्त कर लिया।

प्रशासन ने बुधवार को ही कारोबारियों को हिदायत दी थी कि अगले चार दिन यानी जब तक राष्ट्रपति शिमला में होंगे, इस दौरान दुकानों के बाहर कोई सामान नहीं रखेगा। राष्ट्रपति के काफिले के मालरोड से गुजरने के दौरान सभी को अपनी दुकानों के शटर नीचे करने होंगे। कारोबारियों ने इसके बावजूद वीरवार को दुकानों के बाहर सामान रखा था। इस पर निगम के अधिकारियों ने पहले खुद मालरोड का जायजा लिया। इसके बाद निगम की स्टेट ब्रांच की टीम ने बाजार का दौरा कर दुकानों के बाहर सामान लगाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की। वहीं पैदल चलने के लिए रिज मैदान पर भी अलग से व्यवस्था की गई है। कारोबारियों ने किया शटर डाउन करवाने का विरोध

शहर के कारोबारियों ने जिला व निगम प्रशासन की कार्रवाई का विरोध किया है। शिमला व्यापार मंडल के अध्यक्ष हरजीत मंगा सहित मालरोड व्यापार मंडल ने भी विरोध किया है। उनका कहना है कि राष्ट्रपति का शिमला में स्वागत है। शहर के कारोबारी भी उनका स्वागत करना चाहते हैं, लेकिन उनका काफिला गुजरते ही शहर के कारोबारियों की दुकानों को बंद करवाना तर्कसंगत नहीं है। कारोबारियों के सामान को जल्द ही वापस करना चाहिए। कारोबारी पहले ही कोरोना की मंदी से परेशान हैं, अब निगम उनका सामान जब्त कर परेशान कर रहा है। लोगों ने उठाए सवाल, घरो में पानी नहीं और सड़कें धो रहा निगम

शहर में एक सप्ताह से लोगों को पीने के लिए पानी नहीं मिल रहा है और आम जनता पानी के लिए परेशान है। इसी बीच वीरवार को निगम प्रशासन ने जब टैंकर से रिज मैदान की धुलाई का काम शुरू किया तो शहर में चर्चा शुरू हो गई कि आम लोगों से सरकार व प्रशासन को कोई सरोकार नहीं है। उन्हें पानी मिले या न मिले, लेकिन सड़कों की सफाई पानी से करवाना जरूरी है। इस दौरान कुछ लोगों ने मौके पर ही निगम के अधिकारियों के समक्ष पानी की कमी का मामला उठाया।

Edited By: Jagran