शिमला, राज्य ब्यूरो। लोकसभा चुनाव में देशभर में कांग्रेस की करारी हार होने के बाद भी कोई सबक नहीं सीखा गया है। हिमाचल कांग्रेस में गुटबाजी चरम पर पहुंच गई है। कांग्रेस में नेता अपने वर्चस्व की लड़ाई लड़कर एक-दूसरे को नीचा साबित करने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। कांग्रेस कभी दो से तीन गुटों में बंटी होती थी। लेकिन अब हालत यह लग रही है कि कांग्रेस पांच गुटों में बंट गई है।

पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र्र सिंह और कांग्रेस के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष सुखविंदर सुक्खू गुट की लड़ाई लोकसभा चुनाव से पूर्व और अब चरम पर है। हार के लिए वीरभद्र के बयानों को लेकर सुक्खू गुट उनकी घेराबंदी कर रहा है। वहीं सुक्खू के राहुल के अध्यक्ष बने रहने के प्रस्ताव को लेकर वीरभद्र गुट भी कार्रवाई की मांग कर रहा है। कांग्रेस इतिहास में पहली बार एक ही बात के लिए पार्टी के दो प्रस्ताव भेजे गए हैं। एक प्रस्ताव सुक्खू ने पहले ही भेज दिया था। कांग्रेस नेता ही कहने लगे हैं कि प्रदेश कांग्रेस कमेटी में क्या दो-दो अध्यक्ष हैं जो दो प्रस्ताव पारित कर अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी को भेजे गए।

वहीं, पार्टी प्रदेशाध्यक्ष कुलदीप राठौर, पूर्व मंत्री जीएस बाली व कौल सिंह का गुट भी सक्रिय है। कुलदीप राठौर अपनी कुर्सी बचाने और गुटों में सामंजस्य बैठाने के प्रयास में एक-दूसरे पर बयानबाजी करने वाले कांग्रेस नेताओं पर नकेल कसने में पहले ही दिन से नाकाम रहे हैं। वह केवल चेतावनी जारी करने तक सीमित रहे हैं।

चाहे लोकसभा चुनाव के दौरान वीरभद्र्र सिंह द्वारा कांग्रेस प्रत्याशियों और सुखराम पर की गई आया राम-गया राम की टिप्पणी हो या अब सुक्खू के राहुल गांधी के अध्यक्ष बने रहने को लेकर विधायकों व कांग्रेस नेताओं के हस्ताक्षर करवा कर प्रस्ताव भेजने की बात, गुटबाजी मुखर हुई है। आने वाले समय में जब हार को लेकर चारों संसदीय क्षेत्रों से रिपोर्ट आएगी तो हालात और खराब होंगे जिसमें गुटबाजी और आपसी लड़ाई सबसे ऊपर होगी। 

उपचुनाव में हार का कारण बन सकती है आपसी जंग

कांग्रेस नेताओं में आपसी जंग अब लोकसभा चुनाव के बाद विधानसभा उपचुनाव में हार का कारण बन सकती है। नेताओं की आपसी लड़ाई का असर पाटी के कार्यकर्ताओं पर पड़ रहा है। लोगों का विश्वास कांग्रेस व इसके नेताओं से टूट रहा है। कुलदीप राठौर की अध्यक्षता में पहला आम चुनाव हुआ। इसमें पार्टी की आज तक के चुनावों में सबसे शर्मनाक हार हुई है। कांग्रेस का कोई भी नेता अपने हलके और यहां तक कि अपने बूथ से लीड नहीं दिला सका है। बड़े-बड़े पदों पर बैठकर लीड न दिलाने के बाद भी अभी तक राहुल गांधी की तरह किसी भी नेता ने पद से इस्तीफा नहीं दिया है।

संगठन में होगा फेरबदल : राठौर

कुलदीप राठौर ने कहा कि लोकसभा चुनाव में हार के कारणों की समीक्षा की जाएगी। कांग्रेस नेताओं में आपसी बयानबाजी पर विराम लगाकर सख्त कार्रवाई की जाएगी। सुक्खू से बात की गई है जिन्होंने अपनी तरफ से ही राहुल के अध्यक्ष बने रहने के लिए दो दिन पूर्व पत्र लिखे जाने की बात की है। सुक्खू ने जो प्रस्ताव भेजा है, उसे खंगाला जाएगा। हार के कारणों को जांचकर इसके कारणों पर मंथन होगा। संगठन में फेरबदल होगा। काम न करने वाले और पार्टी विरोधी गतिविधियों के लिए नेताओं पर कार्रवाई होगी। रिपोर्ट के आधार पर पार्टी के विरोध में कार्य करने वालों पर सख्त कार्रवाई कर उन्हें पार्टी से बाहर किया जाएगा।

पूर्व कांग्रेस अध्यक्षों ने दिया समर्थन

काग्रेस राज्य कार्यकारिणी की बैठक में पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष भी नहीं पहुंचे। उन्होंने लिखित तौर पर पत्र लिखकर अपना समर्थन दिया है।

कांग्रेस को नुकसान पहुंचाने वालों पर हो कार्रवाई : अग्निहोत्री

नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि भाजपा का यह एकमात्र प्रयास रहा है कि देश को कांग्रेस मुक्त किया जाए। इसलिए भाजपा राहुल गांधी को अध्यक्ष पद से हटाने की रणनीति पर चल रही है। हमें उनकी इस नीति को सफल नही होने देना है। कांग्रेस और देश के लिए राहुल गांधी का नेतृत्व जरूरी है। इसलिए उनका इस पद से हटना किसी भी सूरत में सहन नही किया जा सकता है। कांग्रेस को नुकसान पहुंचाने वाले पार्टी नेताओं पर कार्रवाई होना जरूरी है।  

भाजपा ने धन बल का इस्तेमाल कर षड्यंत्र रचा : वीरभद्र

पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र्र सिंह ने आरोप लगाया कि लोकसभा चुनाव जीतने के लिए भाजपा ने धन बल का इस्तेमाल कर षड्यंत्र रचा जो शर्मनाक है। लोकसभा चुनाव में पहली बार ऐसा खेल देखने को मिला जिसमें चुनाव से पूर्व केंद्र सरकार ने लोगों को पैसा बांटा और चुनाव आयोग मूकदर्शक बना रहा। ईवीएम का सबसे बड़ा घोटाला होने के साथ सरकारी मशीनरी का जमकर दुरुपयोग किया गया। 

वीरभद्र्र सिंह ने कांग्रेस राज्य कार्यकारिणी की बैठक के बाद पत्रकारों से कहा कि बूथ स्तर पर मतदान को लेकर तथ्यों को एकत्रित किया जा रहा है। हार के बाद जीत आती है और जीत के बाद हार। हार के कारणों पर मंथन कर उन्हें दूर कर कांग्रेस को दोबारा मजबूत करने की जरूरत है। लोकसभा चुनाव से पूर्व लोगों के खाते में दो हजार रुपये से छह हजार रुपये डाले गए। इस तरह से धन देकर वोट लेने के लिए चुनाव आयोग ने भी कुछ नहीं किया। हार के कारणों को खोजकर उन्हें दूर किया जाना चाहिए जिससे कांग्रेस को मजबूत किया जा सके। हार से घबराने की जरूरत नहीं है। एक-दूसरे पर हार का ठीकरा फोड़कर पार्टी को मजबूत नहीं किया जा सकता है। 

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Posted By: Babita