शिखा वर्मा, शिमला

इंदिरा गांधी मेडिकल कालेज (आइजीएमसी) में एसआरएल लैब को बंद हुए एक माह से भी ज्यादा का समय हो गया, लेकिन अभी तक दूसरी क्रसना कंपनी व्यवस्था को पटरी पर नहीं ला पाई है। इसके कारण मरीजों को तीन से चार दिन बाद टेस्ट की रिपोर्ट मिल रही है, जिससे उनकी परेशानी कम होने के बजाय बढ़ रही है।

अस्पताल की सरकारी लैब में मरीजों को टेस्ट के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है। लैब के सामने मरीजों की लंबी कतार लगी होती है। सरकारी लैब में एक बजे तक टेस्ट होते हैं। इसके बाद मरीजों को आपातकाल में टेस्ट करवाने पड़ते हैं। आपातकाल में टेस्ट करवाने के लिए भी मरीजों को अपनी बारी का लंबा इंतजार करना होता है। अस्पताल में मरीज इलाज करवाने के सुबह ही आ जाते हैं। ऐसे में उनका पूरा दिन इलाज करवाने में लग जाता है। इसके कारण मरीजों को कई बार घर जाने के लिए देरी भी हो जाती है। इससे मरीजों को दूसरे दिन अपने टेस्ट करवाने के लिए आना पड़ता है। सरकारी लैब में तीन से चार सौ मरीजों के ही हो रहे टेस्ट

सरकारी लैब में एक बजे तक टेस्ट किए जा रहे हैं। लैब में हर रोज 300 से 400 मरीजों के टेस्ट किए जा रहे हैं। लैब में सुबह नौ बजे से टेस्ट करने शुरू कर दिए जाते हैं। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि मरीजों को हर सुविधा देने का प्रयास किया जा रहा है। मजबूरी में निजी लैब में करवाने पड़ रहे टेस्ट

क्रसना बायोटेक ने अस्पताल में अभी तक सैंपल लेने शुरू किए हैं, लेकिन इसकी रिपोर्ट मरीजों को चार दिन के बाद मिल रही है। लैब टेस्ट के सैंपल को चंडीगढ़ भेज रही है इसके कारण मरीजों की रिपोर्ट आने में देरी हो रही है। कई बार तो मरीजों को सात दिन बाद रिपोर्ट मिल रही है। इससे बचने के लिए मजदूरों को मजबूरन निजी लैब में टेस्ट करने पड़ रहे हैं। लैब ने सैंपल लेने का काम शुरू कर दिया है। लैब के पदाधिकारियों को जल्दी काम शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं। मरीजों को दिक्कत का सामना न करना पड़े, इसके लिए अस्पताल पूरी तैयारी कर रहा है।

सुरेंद्र शर्मा, प्रिंसिपल आइजीएमसी।

Edited By: Jagran