रमेश सिगटा, शिमला

हिमाचल सरकार ने इंडियन टेक्नोमेक कंपनी से जुडे़ 2100 करोड़ के कर घोटाले के विशेष ऑडिट के आदेश दिए हैं। सूत्रों के अनुसार शिमला का महालेखाकार कार्यालय (एजी) मामले का बारीकी से ऑडिट करेगा कि सरकार को कर के तौर पर क्या इतना ही चूना लगाया या इससे ज्यादा। कंपनी ने पांवटा स्थित कारखाने में फर्जी बिलों के आधार पर सरकारी अफसरों संग मिलीभगत से टर्नओवर ज्यादा दिखाई। इसके सहारे कंपनी ने 18 बैंकों से 1600 करोड़ का कर्जा लिया। अब ब्याज समेत यह कर्जा करीब ढाई हजार करोड़ तक पहुंच गया है। सभी तरह के कर और कर्ज को जोड़कर यह घोटाला छह हजार करोड़ का है। अभी तक इसकी जांच स्टेट सीआइडी कर रही है, लेकिन विशेष ऑडिट करवाने से कर का सही आकलन हो पाएगा। 2100 करोड़ का आकलन आबकारी एवं कराधान विभाग के अधिकारियों का है। सीआइडी अब कोर्ट में तीसरी चार्जशीट दायर करने की तैयारी में है। क्या कहती है इडी की जांच

सूत्रों के अनुसार प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने करीब 44 संपत्तियों का पता लगाया है। बैंकों से लिए 1600 करोड़ के मूल कर्ज को कहां निवेश किया, इसमें प्रारंभिक जांच में मनी लांड्रिंग का कोण सामने आया। सीआइडी की जांच के अनुसार कंपनी ने करीब 100 बीघे में भू सौदे किए। यह रजिस्ट्री और लैंड एग्रीमेंट पर हुई हैं। हालांकि जांच में सात ऐसे वाहनों को शामिल किया है, जिसे आबकारी एवं कराधान विभाग ने अपनी जांच रिपोर्ट में नहीं दर्शाया। ईडी इस बात की जांच कर रही है कि टेक्नोमेक ने कितनी दूसरी कंपनियों में पैसा लगाया है। जांच रिपोर्ट में बेनामी संपत्तियों का जिक्र है, जबकि आबकारी विभाग ने कंपनी के पास 233 बीघा जमीन होने का दावा जताया है। आबकारी व कराधान विभाग ने कंपनी की वेल्यूएशन हिमकॉन एजेंसी से करवाई है, जिसमें वेल्यूएशन 330 करोड़ रुपये आंकी है।

Posted By: Jagran

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