शिमला, जेएनएन। हिमाचल प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन (एचपीसीए) मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने दूसरी एफआइआर भी रद करने का फैसला सुनाया है। सर्वोच्च न्यायालय के इस फैसले से सांसद अनुराग ठाकुर को बड़ी राहत मिली है। इस मामले में सेवानिवृत्त आइएएस अधिकारी पीसी धीमान और केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर मुख्य सतर्कता अधिकारी के तौर पर सेवाएं दे रहे केके पंत भी दोषमुक्त हो गए हैं। धर्मशाला क्रिकेट स्टेडियम के साथ शिक्षा विभाग के कर्मचारियों के रिहायशी मकान थे। इन्हें स्टेडियम निर्माण के लिए गिराया गया था।

इस संबंध में सरकारी भूमि पर अतिक्रमण करने और सरकारी इमारत को गिराने का मामला दर्ज हुआ था। इसमें राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय धर्मशाला के दो पूर्व प्रिंसिपल नरेंद्र अवस्थी और एलएम शर्मा के साथ-साथ लोक निर्माण विभाग के एक्सईएन देवी चंद चौहान व एसडीओ महेंद्र कटोच के खिलाफ मामला दायर हुआ था। दो नवंबर को सर्वोच्च न्यायालय ने एचपीसीए से जुड़े सभी तीनों मामलों में आरोपितों को दोषमुक्त कर दिया था, लेकिन सर्वोच्च न्यायालय की पीठ ने अपने आदेश की समीक्षा करने का निर्णय लिया था। इस मामले में पीठ प्रतिवादी वीरभद्र सिंह का पक्ष सुनने के बाद एफआइआर रद करने का फैसला वीरवार को दिया।

ये था मामला

एफआइआर 14/13 से जुडे़ मामले में सुनवाई हुई। यह मामला तीन अक्टूबर 2013 को धर्मशाला में दर्ज हुआ था। उस समय सरकारी इमारत को गिराने से जुड़े मामले में दो जगह मामला दर्ज किया गया था। पहला मामला पुलिस ने और दूसरा सतर्कता विभाग ने दर्ज किया था। पहले मामले में दो वर्ष पहले प्रदेश उच्च न्यायालय ने एचपीसीए के हक में फैसला दिया था। लेकिन सतर्कता विभाग की ओर से दायर एफआइआर में ऐसा नहीं हुआ था। अब इस मामले में शीर्ष अदालत ने राहत दी है।

इनको भी मिली राहत आइएएस पीसी धीमान सेवानिवृत हो चुके हैं, जबकि केके पंत केंद्र में मुख्य सतर्कता अधिकारी हैं। इसी तरह धर्मशाला कॉलेज के दोनों प्रिंसिपल नरेंद्र अवस्थी और एलएम शर्मा भी सेवानिवृत्त हो चुके हैं। लोक निर्माण विभाग के एक्सईएन देवी चंद चौहान व एसडीओ महेंद्र कटोच, पूर्व शिक्षा निदेशक ओपी शर्मा के साथ-साथ एचपीसीए के प्रवक्ता संजय शर्मा और निदेशक मंडल के पदाधिकारी भी स्वत: नामजद थे। सर्वोच्च न्यायालय के फैसले से इन्हें भी राहत मिली है।