भवनों और सड़कों से भी पैदा होगी सौर ऊर्जा, हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों को दी तकनीक की जानकारी
एचपीयू शिमला में अगली पीढ़ी की सौर ऊर्जा तकनीकों पर एक कार्यशाला आयोजित की गई, जिसमें छात्रों को भवनों और ...और पढ़ें

भवनों और सड़कों से भी पैदा होगी सौर ऊर्जा। फाइल फोटो
HighLights
एचपीयू में अगली पीढ़ी की सौर ऊर्जा तकनीकों पर कार्यशाला।
छात्रों को बीआईपीवी और आरआईपीवी तकनीकों की जानकारी मिली।
स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में शोध और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
जागरण संवाददाता, शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (एचपीयू) के सेंटर फॉर ग्रीन एनर्जी एंड नैनोटेक्नोलॉजी की ओर से शुक्रवार को अगली पीढ़ी की सौर ऊर्जा तकनीकों पर एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग (ईसीई) और इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के विद्यार्थियों को भवनों और रेल-सड़क ढांचे में सौर ऊर्जा तकनीक के इस्तेमाल की जानकारी दी गई।
कार्यशाला में बिल्डिंग इंटीग्रेटेड फोटोवोल्टिक्स (बीआईपीवी) और रेल/रोड इंटीग्रेटेड फोटोवोल्टिक्स (आरआईपीवी) पर चर्चा की गई। इन तकनीकों के माध्यम से भवनों और परिवहन से जुड़े बुनियादी ढांचे को सौर ऊर्जा उत्पादन के लिए उपयोगी बनाया जा सकता है। इससे पारंपरिक ढांचे को स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन के साधन के रूप में विकसित करने की संभावनाएं बढ़ेंगी।
कार्यशाला का समन्वय डॉ. अंजलि शर्मा, डॉ. जेसमिन कौर और डॉ. मनीष ने किया। इस पहल को जर्मनी की संस्था डॉयचे गेसेलशाफ्ट फॉर इंटरनेशनेल जुसामेनारबाइट (जीआइजेड) का सहयोग प्राप्त है। इसमें ग्रांट थॉर्नटन भारत एलएलपी, सीएसटीईपी, सीएसआइआर-एनआइआइएसटी और उद्योग जगत के साझेदार भी सहयोग कर रहे हैं।
पारदर्शी सौर सामग्री और ऊर्जा दक्षता पर चर्चा
कार्यशाला में उद्योग विशेषज्ञ वरुण सिंह, विनीत भाटिया, निशांत वर्मा, नेहा टिपले, अक्षय भारद्वाज, परेश नाडिग और ऋषभ शर्मा ने तकनीकी सत्र लिए। विशेषज्ञों ने पारदर्शी सौर सामग्री, भवनों और परिवहन ढांचे में फोटोवोल्टिक प्रणालियों के एकीकरण, सौर ऊर्जा प्रणाली की डिजाइन और ऊर्जा दक्षता जैसे विषयों पर जानकारी दी।
विशेषज्ञों ने बताया कि आधुनिक फोटोवोल्टिक तकनीकों के माध्यम से भवनों और परिवहन से जुड़े ढांचे को स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन में इस्तेमाल किया जा सकता है।
इससे नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में नए अवसर पैदा होंगे। विद्यार्थियों को उद्योग जगत में अपनाई जा रही तकनीकों, नवीनतम अनुसंधान और व्यावहारिक अनुप्रयोगों से भी अवगत करवाया गया।
विद्यार्थियों को मिलेगा शोध और रोजगार का अवसर
कार्यशाला का उद्देश्य विद्यार्थियों को उभरती सौर ऊर्जा तकनीकों से परिचित करवाना और उन्हें स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में योगदान के लिए तैयार करना था। समन्वयकों ने कहा कि इस तरह की उद्योग आधारित कार्यशालाएं विद्यार्थियों के सैद्धांतिक ज्ञान और व्यावहारिक अनुभव के बीच की दूरी कम करने में मदद करती हैं। इससे नवाचार, शोध और तकनीकी कौशल को बढ़ावा मिलता है।
कार्यशाला में विद्यार्थियों ने विशेषज्ञों के साथ संवाद किया और सौर ऊर्जा के वास्तविक उपयोगों को समझा। समापन सत्र में शैक्षणिक संस्थानों और उद्योग जगत के बीच सहयोग को स्वच्छ ऊर्जा तकनीकों के विकास के लिए महत्वपूर्ण बताया गया।
