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शिमला सचिवालय को मिले 9 करोड़ के नए ब्लॉक, हिमाचल में बढ़ी 320 पीजी मेडिकल सीट; CM बोले- इलाज में नहीं होगी दिक्कत

Published: Mon, 19 Oct 2026 05:16 AM (IST)

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने शिमला सचिवालय में आर्म्सडेल भवन के नए ब्लॉक का लोकार्पण किया, जिससे जगह की कमी दूर होगी।

शिमला सचिवालय के नए ब्लॉक को उद्घाटन करते सीएम सुक्खू। फोटो जागरण

शिमला सचिवालय के नए ब्लॉक को उद्घाटन करते सीएम सुक्खू। फोटो जागरण

HighLights

  1. शिमला सचिवालय में आर्म्सडेल भवन के नए ब्लॉक का लोकार्पण।

  2. प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में 320 पीजी सीटें बढ़ीं।

  3. स्वास्थ्य सेवाओं और प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करने पर जोर।

राज्य ब्यूरो, शिमला। सचिवालय में जगह की कमी दूर करने के लिए आर्म्सडेल भवन का विस्तार किया गया है। मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने रविवार को आर्म्सडेल भवन के चरण-4 के ब्लाक-1 व 2 का लोकार्पण किया। करीब नौ करोड़ रुपये की लागत से तैयार इन ब्लाकों में जल्द ही सरकारी कार्यालय स्थानांतरित किए जाएंगे।

वहीं, स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर मुख्यमंत्री ने दावा किया कि प्रदेश के छह सरकारी मेडिकल कालेजों में पीजी मेडिकल सीटें 277 से बढ़ाकर 597 कर दी गई हैं। यानी विशेषज्ञ डाक्टर बनने के अवसरों में 320 सीटों का इजाफा हुआ है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास के साथ आधारभूत ढांचे का विस्तार भी जरूरी है। सरकार प्रशासनिक सुविधाओं और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने को प्राथमिकता दे रही है।

उन्होंने बताया कि पीजी सीटों में वृद्धि के मामले में आइजीएमसी शिमला सबसे अधिक 91 सीटें बढ़ी और सहटों की संख्या 139 से बढ़ाकर 230 की गई हैं। टांडा मेडिकल कालेज में 99 से 156, मंडी में 24 से 79, नाहन में तीन से 35, चंबा में चार से 32 और हमीरपुर में आठ से 65 सीटें की गई हैं।

सरकारी अस्पतालों को प्रशिक्षित विशेषज्ञ डॉक्टर उपलब्ध होंगे

मुख्यमंत्री ने कहा कि पीजी सीटें बढ़ने से प्रदेश के युवा चिकित्सकों को विशेषज्ञ चिकित्सा शिक्षा के लिए बाहर जाने की जरूरत कम होगी और सरकारी अस्पतालों को प्रशिक्षित विशेषज्ञ डॉक्टर उपलब्ध होंगे। सुक्खू ने कहा कि चार वर्ष पहले मेडिकल कालेजों में चिकित्सकों की उपलब्धता करीब 35 प्रतिशत थी, जिसे अब 70 प्रतिशत से अधिक किया गया है।

अगले एक वर्ष में इसे 80 से 85 प्रतिशत तक पहुंचाने का लक्ष्य है। पुराने चिकित्सा उपकरणों को बदलकर आधुनिक मशीनें उपलब्ध करवाई जा रही हैं। रेडियो डायग्नोसिस सेवाओं में प्रतीक्षा अवधि शून्य करने का प्रयास है। मुख्यमंत्री के अनुसार, विशेषज्ञ सेवाएं प्रदेश में उपलब्ध होने से हर साल लोगों के करीब 1,000 करोड़ रुपये बचाने का लक्ष्य है।