सैलून की आड़ में नशा तस्करी कर जुटाई करोड़ों की प्रॉपर्टी, शिमला पुलिस ने 1.64 करोड़ की जमा पूंजी जब्त की
शिमला पुलिस ने एक नशा तस्कर की 1.64 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति जब्त की है, जो अफीम तस्करी ...और पढ़ें

शिमला पुलिस की ओर से ठियोग में सीज की गई नशा तस्कर की प्रॉपर्टी।
HighLights
शिमला पुलिस ने नशा तस्कर की 1.64 करोड़ की संपत्ति जब्त की।
आरोपी सोहन लाल अफीम तस्करी में लंबे समय से संलिप्त था।
पुलिस अब तस्करों के आर्थिक नेटवर्क को तोड़ने पर ध्यान दे रही है।
जागरण टीम, ठियोग (शिमला)। हिमाचल प्रदेश पुलिस ने नशा तस्करों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। शिमला पुलिस ने एनडीपीएस के एक मामले में तस्करों की 1.64 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति सीज की है। पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपित सैलून की आड़ में लंबे समय से अफीम की तस्करी में संलिप्त था और ठियोग, कोटखाई, रोहड़ू सहित आसपास के क्षेत्रों में इसकी आपूर्ति कर रहा था।
पुलिस थाना ठियोग में इस संबंध में 10 जून 2026 को धारा 18 एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया था। पुलिस को मिली विश्वसनीय सूचना के आधार पर टीम ने रहीघाट, हॉस्पिटल रोड ठियोग स्थित आरोपित सोहन लाल उर्फ हैपी की नाई की दुकान की तलाशी ली। तलाशी के दौरान उसके कब्जे से करीब 71 ग्राम अफीम बरामद हुई। इसके बाद आरोपित को गिरफ्तार कर मामले की जांच शुरू की गई।
जांच आगे बढ़ने पर पुलिस ने आरोपित की वित्तीय गतिविधियों की भी पड़ताल शुरू की। वित्तीय जांच में आरोपित और उसके करीबी सहयोगियों की संपत्तियों, बैंक खातों, आय तथा आय के ज्ञात और वैध स्रोतों का विस्तृत विश्लेषण किया गया।
दोमंजिला दुकान, प्लॉट व गाड़ी की पहचान
पुलिस के अनुसार, जांच के दौरान एक आवासीय भूमि प्लॉट, एक कृषि भूमि, दो मंजिला दुकान, एक वाहन तथा विभिन्न बैंक और डाकघर खातों में जमा धनराशि समेत करीब 1.64 करोड़ रुपये की संपत्तियों की पहचान हुई।
2026 में 12 मामलों में आठ करोड़ की संपत्ति सीज
शिमला पुलिस के अनुसार, वर्ष 2026 में अब तक 12 एनडीपीएस मामलों में वित्तीय जांच की गई है। इन मामलों में आठ करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की चल-अचल और वित्तीय संपत्तियां सीज की जा चुकी हैं। पुलिस के मुताबिक वर्ष 2024 और 2025 में एनडीपीएस मामलों में इस तरह की कोई वित्तीय जांच नहीं की गई थी और न ही इस प्रक्रिया के तहत संपत्तियां सीज हुई थीं।
नशे के साथ अवैध कमाई पर भी निशाना
पुलिस अब नशा तस्करों के खिलाफ कार्रवाई को केवल नशीले पदार्थों की बरामदगी और आरोपियों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रखना चाहती। वित्तीय जांच के जरिए तस्करी से अर्जित अवैध धन और उससे बनाई गई संपत्तियों की पहचान कर उन्हें सीज करने पर भी जोर दिया जा रहा है। पुलिस का मानना है कि तस्करों के आर्थिक नेटवर्क पर चोट कर नशे के कारोबार की कमर तोड़ी जा सके।
