शिमला, जेएनएन। राजधानी का रिज मैदान लगातार दरक रहा है और शिमला नगर निगम भी इसे दरकाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहा। निगम कर्मचारी आए दिन मरम्मत कार्य के नाम पर रिज मैदान को खोखला कर रहे हैं। सोमवार को एक बार फिर निगम ने ऐतिहासिक रिज मैदान के अस्तित्व को बचाने के लिए खानापूर्ति शुरू कर दी है, जो इस बार सीमेंट व मिट्टी भर कर नही बल्कि मोटी दरारों में पत्थरों को भरकर की जा रही है।

निगम के अनुसार ऐसी मुहिम भी तब पूरी होगी यदि मौसम का साथ रहता है। अन्यथा बात अगले वर्ष गर्मियों तक जाएगी। गेयटी थियेटर के सामने धस रहे रिज की मोटी दरारों ने न सिर्फ रिज की शोभा पर ग्रहण लगा है बल्कि रिज मैदान की वास्तविकता भी बयान कर रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार रिज मैदान पर चल रहे इस मरम्मत कार्य में रिज के दरक रहे क्षेत्र को सीमेंट से भरने का काम शुरू किया जा रहा है। निगम द्वारा इससे पहले भी रिज मैदान पर पड़ी दरारों को सीमेंट से भर कर खानापूर्ति की जाती रही है। निगम की इस औपचारिकता से ऐतिहासिक रिज मैदान खतरे में है। मरम्मत के नाम पर मैदान की बार-बार खोदाई से रिज के धंसने का खतरा घटने की जगह बढ़ता ही जा रहा है। रिज मैदान पर अंग्रेजों के जमाने का पेयजल भंडारण टैंक हैं। जहा से पूरे शहर को पेयजल आपूर्ति की जाती है। वर्ष 2011 में रिज के धंसने की प्रक्रिया शुरू हुई थी। 2011 में यहा का बड़ा भू-भाग अपनी जगह से पूरी तरह से बैठ गया था, जिसे बचाने के लिए नगर निगम ने इसका बचाव कार्य आरंभ किया था। वह रिज को बचाने का अस्थायी समाधान था जो बरसात के दौरान अकसर जवाब दे देता है।

रिज पर धंस रहे हिस्से का निरीक्षण किया गया तथा निरीक्षण के दौरान राकेश कुमार शर्मा उपमहापौर व अधिशाषी अभियंता सुधीर गुप्ता भी मौजूद रहे। जियोलोजिकल विभाग को पत्र भेज दिया गया है और लगभग 10 दिन में इस बारे संबंधित विभाग को उचित कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।

-कुसुम सदरेट, महापौर नगर निगम शिमला।