जागरण संवाददाता, शिमला : नगर निगम शिमला की मासिक बैठक में शहर के कारोबारियों को राहत दी गई है। बैठक में निगम से किराये पर ली गई दुकानों पर फिलहाल संपत्ति कर नहीं लिया जाएगा। हालांकि निगम इस मसले पर कानूनी सलाह लेगा। इसके बाद ही इस पर अंतिम फैसला लिया जाएगा।

निगम के पार्षदों इंद्रजीत सिंह और संजीव ठाकुर सहित अन्य ने इस मामले को बैठक में उठाया। बैठक में प्रस्ताव लाया था कि निगम की 1200 संपत्तियां जो किराये पर दी हैं उन पर भी संपत्ति कर लगाया जाए। शहर में निगम के वार्डो में बनी कवर पार्किग की फीस भी 1000 से 800 रुपये करने का फैसला लिया गया। इसमें निगम ने कहा कि फिलहाल इसका प्रशासन की ओर से दोबारा टेंडर किया जाएगा। इस टेंडर में भी कोई बिडर नहीं आता है तो निगम अपने स्तर पर ही इसे चलाने का काम करेगा। राजधानी में इस तरह की निगम ने 17 पार्किगें बना रखी हैं। इनमें 345 वाहन पार्क करने की क्षमता है। बंदरों से बचने के लिए भवनों में जाली लगाने का करें प्रावधान

राजधानी में बंदरों के बढ़ते आतंक पर शहरी विकास मंत्री सुरेश भारद्वाज ने नगर निगम आयुक्त पंकज राय को निर्देश दिए कि इस मसले पर शीघ्र ही विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक करें। निगम की बैठक में वर्चुअल रूप से संबोधित करते हुए सुरेश भारद्वाज ने कहा कि शहर में बंदरों का आतंक गंभीर समस्या बन गया है। इससे निपटने के लिए प्रशासन को समय रहते कदम उठाने चाहिए। पिछले दिनों एक महिला की बंदर के हमले में इमारत से गिरने से मौत हो गई। शहर में रोजाना बंदरों के काटने के मामले आते हैं। अब समय आ गया है कि सभी को इससे निपटने के लिए रास्ता निकालना चाहिए। मंत्री ने कहा कि नगर निगम शहर में बने भवनों में जालियां लगाने का प्रावधान करे। इसके लिए नियमों में जो भी परिवर्तन करने की जरूरत है उसे शीघ्र ही संशोधित कर आम लोगों को बंदरों के आतंक से सुरक्षित बनाया जाए।

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