राज्य ब्यूरो, शिमला : प्रदेश सरकार ने वीरवार को निजी स्कूलों की मनमानी रोकने के लिए नए निर्देश जारी कर दिए हैं। इसके अनुसार हिमाचल में निजी स्कूल अब हर साल में मनमर्जी से फीस-फंड नहीं बढ़ा सकेंगे। स्कूलों में किताबें, कॉपियां व वर्दी भी नहीं बेची जा सकेगी। यहां तक कि अभिभावकों कों चिह्नित दुकानों से इनकी खरीद के लिए भी नहीं किया जा सकेगा। भवन, विकास, अधोसंरचना निधि भी विद्यार्थियों से नहीं वसूली जाएगी। शैक्षणिक टुअर अनिवार्य नहीं रहेंगे।

मुख्यमंत्री कार्यालय और शिक्षा मंत्री के निर्देश के बाद उच्चतर शिक्षा निदेशक डॉ. अमरजीत कुमार शर्मा ने वीरवार को कड़े निर्देश जारी किए हैं। निजी स्कूलों को हाईकोर्ट के निर्देश का पालन करना होगा। अगर ऐसा नहीं हुआ तो विभाग संबंधित स्कूल को जारी अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) को रद कर देगा। निर्देश के अनुसार निजी स्कूल प्रबंधन प्रत्येक कक्षा में छात्रों से प्रवेश शुल्क नहीं वसूलेगा। स्कूल की फीस और निधियां शोषण करने वाली नहीं रहेगी। ये शिक्षा प्रसार में सहायक होंगी।

शिक्षा निदेशक ने सात प्रमुख बिंदुओं को इनमें शामिल किया गया है। शैक्षणिक सत्र शुरू होने से पहले निजी स्कूलों को पीटीए की बैठक करनी होगी। इसमें अभिभावकों की सहमति से आगामी शैक्षणिक सत्र के लिए प्रस्तावित फीस, फंड पर सामान्य बैठक में विचार-विमर्श करना होगा। इसमें लिए जाने वाले निर्णयों को स्कूल के नोटिस बोर्ड, वेबसाइट पर दर्शाना पड़ेगा। पीटीए में दो तिहाई सदस्य माता-पिता में से होंगे और एक तिहाई शिक्षकों में से। अध्यक्ष अभिभावकों में से ही बन सकेगा।

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बिना अनुमति नहीं बेचेंगे किताबें-वर्दी

बिना अनुमति से स्कूलों में किताबें, कॉपियां, वर्दी, जूते आदि नहीं बेचे जा सकेंगे। शैक्षणिक टुअर अनिवार्य की जगह स्वैच्छिक होंगे। मौजूदा सत्र में वसूली गई फीस का ब्योरा आगामी सत्र के लिए होने वाली बैठक में रखा जाएगा। मासिक, वार्षिक ब्योरा कक्षा वार रखा जाएगा।

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छात्र अभिभावक संघ की बड़ी जीत

छात्र अभिभावक संघ के नेता विजेंद्र मेहरा का कहना है कि नए सत्र के लिए जारी किए निर्देश उनके आंदोलन के कारण संभव हुए हैं। उन्होंने मांग की है कि इन निर्देशों का सख्ती से पालन किया जाए और उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई हो।

Posted By: Jagran

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