राज्य ब्यूरो, शिमला : हिमाचल में सोमवार को निजी बस ऑपरेटरों की हड़ताल से यात्री बेहाल रहे। चंबा जिला को छोड़कर अन्य जिलों में गांवों से लेकर कस्बों व शहरों तक परिवहन व्यवस्था चरमरा गई। लोगों को कई घंटों तक सरकारी बसों का इंतजार करना पड़ा। बच्चों से लेकर बूढ़े सब परेशान रहे।

स्कूलों व कॉलेजों के विद्यार्थियों को पैदल सफर करने पर मजबूर होना पड़ा। हड़ताल के कारण लोग सड़कों पर परेशान नजर आए। ग्रामीण इलाकों से कस्बों में जाने वाले लोग बसें न मिलने से परेशान हुए। स्कूलों व कॉलेजों के कई विद्यार्थी समय पर शिक्षण संस्थान नहीं पहुंच पाए। उन्हें वापस घर पहुंचने में भी देर हो गई। सरकारी बसें खचाखच भरी रहीं और इसमें ओवरलोडिंग भी हुई लेकिन लोगों के पास दूसरा कोई विकल्प नहीं था। हड़ताल हिमाचल में, वार्ता के लिए दिल्ली बुलाया

-परिवहन मंत्री ने भूटान से किया निजी बस ऑपरेटर यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष को फोन

हड़ताल के पहले ही दिन परिवहन मंत्री गोविंद ठाकुर ने भूटान से निजी बस ऑपरेटर यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष राजेश पराशर को फोन किया। उन्होंने हड़ताल खत्म करने का आग्रह किया। मंत्री ने उन्हें वार्ता के लिए दिल्ली बुलाया।

अध्यक्ष ने कहा कि वह तब तक हड़ताल वापस नहीं लेंगे, जब कि सरकार उनकी मांगों पर ठोस फैसला नहीं लेगी। इसके बाद यूनियन के नेता को फिर संदेश आया कि मुख्यमंत्री और परिवहन सचिव के बीच बातचीत हो रही है। हिमाचल में दो तरह का बस किराया

निजी बस ऑपरेटर यूनियन के अध्यक्ष के मुताबिक हिमाचल में दो तरह का बस किराया है। पहाड़ी क्षेत्रों के लिए एक रुपये 45 पैसे प्रति किलोमीटर और मैदानी इलाकों के लिए केवल 93 पैसे प्रति किलोमीटर किराया है। हिमाचल में न्यूनतम किराया पांच रुपये है। हरियाणा में न्यूनतम किराया सबसे ज्यादा 12 रुपये है। पंजाब में भी यही किराया लागू है। हरियाणा में सामान्य किराया एक रुपये 25 पैसे है। पहाड़ी प्रदेशों में सबसे ज्यादा किराया उत्तराखंड में है। वहां सामान्य किराया एक रुपये 75 पैसे है। यूनियन हिमाचल में न्यूनतम किराया कम से कम दस रुपये करने व सामान्य किराये में 50 फीसद की बढ़ोतरी की मांग कर रहे हैं।

Posted By: Jagran