शिमला, राज्य ब्यूरो। हिमाचल प्रदेश पुलिस 21 दिन तक सड़क पर नजर आएगी। प्रदेश की इतिहास में यह पहली बार होगा। आम जनता में धारणा यही है कि खाकी वर्दी वाले निष्ठुर होते हैं, लेकिन कोरोना वायरस से संकट की घड़ी में यही फोर्स जीवनरक्षक की भूमिका में है। दिन रात सड़क पर मौजूद रहकर व्यवस्था संभाल रहे हैं। छिटपुट अपवाद को छोड़ दें तो पुलिस सजगता से कार्य कर रही है, ताकि आम जनता सुरक्षित रहे। परिवारों से दूर रहकर अपनी ड्यूटी निभा रहे हैं। इनका अवकाश भी पूरी तरह से रद किया गया है। कई जगहों पर तो पुलिस जरूरतमंदों की मदद भी कर रही है। सड़कों पर नाके लगाए गए हैं।

सुनाई दे रही है बूटों की धमक

अंतरराज्यीय सीमाओं पर पुलिस बल तैनात किया गया है। दो जिलों की सीमाओं पर भी बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात है। जिले के भीतरी इलाकों में भी पुलिस के बूटों की धमक गांव तक सुनाई दे रही है। राज्य की सभी 6 बटालियनों के जवान कर्फ्यू ड्यूटी में तैनात किए हैं। पुलिस के सभी अधिकारियों और कर्मचारियों की छुट्टियां पहले ही रद की जा चुकी हैं। वे उन जगहों पर भी तैनात किए गए हैं जहां कोरोना के संदिग्ध क्वारंटाइन पर रखे गए हैं। थानों और चौकियों में अतिरिक्त रिजर्व रखी गई है, ताकि आपात स्थिति से सख्ती से निपटा जा सके।

सीआइडी, विजिलेंस का स्टाफ भी किया जा सकता है तैनात

अभी तक सीआइडी और विजिलेंस के स्टाफ की कर्फ्यू ड्यूटी नहीं लगाई है। राज्य पुलिस इनके स्टाफ का भी सदुपयोग कर सकती है। इन्हें भी जल्द ही नई ड्यूटी सौंपी जा सकती है। इस बारे में आला अधिकारी जल्द ही फैसला ले सकते हैं।

बटालियनों से फोर्स सड़क पर तैनात की गई है। सारी यूनिफार्म पुलिस अब कर्फ्यू ड्यूटी निभा रही है। लोगों को हर हाल में कोरोना से बचाना है, यही मानवता की सबसे बड़ी सेवा है।

-एन वेणुगोपाल, एडीजीपी एपीटी।

जल शक्ति विभाग का फील्ड स्टाफ पूरी तरह से मुस्तैद है। इस स्टाफ को किसी भी प्रकार का अवकाश नहीं है। लॉकडाउन और कर्फ्यू लगने से पहले ही विभाग ने इस संबंध में निर्देश जारी किए थे। इन निर्देशों का पालन किया जा रहा है। किसी भी कर्मचारी को अपने मोबाइल बंद नहीं रखने होंगे। इनमें जलरक्षक, कीमैन, फीटर, जेई आदि शामिल है। सभी एक्सईएन इनकी मॉनिटरिंग करने का जिम्मा संभाल रहे हैं। लोगों के घरों को पानी की सप्लाई हर हाल में सुनिश्चित करनी होगी। कर्फ्यू के दौरान क्योंकि अधिकांश लोग अपने ही घरों पर बने हुए हैं इस कारण पानी की भी ज्यादा खपत हो रही है। भी पंप ऑपरेटर रोजाना पंप हाउस पर रिपोर्ट करें हैं उन्हें अपने आला अधिकारियों को रोजाना रिपोर्ट करनी पड़ रही है।

Posted By: Babita kashyap

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