जागरण संवाददाता, शिमला : जिला शिमला में सोमवार को निजी बस ऑपरेटरों की हड़ताल का व्यापक असर रहा। जिला में कोई भी निजी बस नहीं चली। इस कारण सरकारी बसों में भारी भीड़ रही और लोग बसों में नहीं चढ़ पाए। निजी बस ऑपरेटरों की हड़ताल के कारण राजधानी शिमला व जिले के ऊपरी हिस्सों में लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा, जिन क्षेत्रों में निजी बसें ही चलती हैं। विद्यार्थी व कर्मचारी स्कूल व कार्यालय नहीं पहुंच सके, वहीं कुछ बच्चे देरी से स्कूल पहुंचे।

राजधानी शिमला में करीब 130 रूट निजी बसों के चलते हैं, जिसमें शहर के 70 फीसद लोग निर्भर रहते हैं। ऐसे में एक भी बस न चलने के कारण लोग परिवहन निगम की बसों का इंतजार करते रहे। निगम की बसें भी ओवरलोड थी। ऐसे में घंटों लोगों को बसों का इंतजार करना पड़ा या अन्य साधनों से गंतव्य तक पहुंचे।

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टैक्सी चालकों की मौज

निजी बस ऑपरेटरों की हड़ताल का फायदा निजी टैक्सी चालकों ने खूब उठाया। बसों की कमी के कारण लोगों को टैक्सियों का सहारा लेना पड़ा। मजबूरी का फायदा उठाकर टैक्सी चालकों ने भी मनमाने दाम वसूले। यात्रियों को दोगुने पैसे देकर सफर करने को मजबूर होना पड़ा।

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बस रूट को क्लब कर चलाने का फार्मूला भी फेल

परिवहन निगम का ग्रामीण क्षेत्रों में कम सवारियों वाले रूटों को क्लब कर चलाने का फार्मूला भी फेल ही रहा। क्लब रूट में दोनों ही रूट प्रभावित हुए। एक रूट पर भी समय से बस नहीं पहुंची, जिस कारण ग्रामीण क्षेत्रों से शहर आने वाले लोगों को भारी दिक्कतें झेलनी पड़ी।

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बच्चे को उठाकर पहुंचाना पड़ा अस्पताल

खलीनी निवासी राकेश ठाकुर का कहना है कि खलीनी से अधिकतर निजी बसें ही आती हैं। सोमवार सुबह 11 बजे उनका बेटा घर पर गिर गया। उसे अस्पताल लाने के लिए बसें न होने के कारण टैक्सी का सहारा लेना पड़ा। टैक्सी चालक को 250 रुपये देने के बावजूद लिफ्ट के पास कांग्रेस के चक्का जाम के कारण अस्पताल समय पर नहीं पहुंच पाए। होटल होलीडे होम से लेकर रिपन अस्पताल तक बच्चे को उठाकर पहुंचाना पड़ा। हड़ताल और चक्का जाम के कारण भारी परेशानी झेलनी पड़ी।

मल्याणा की रजनी का कहना है कि बसों की हड़ताल के कारण अपनी गाड़ी से रिपन अस्पताल आना पड़ा, लेकिन गाड़ी भी अस्पताल नहीं पहुंची। ऐसे में भारी परेशानी का सामना करना पड़ा लोगों को पेट्रोल-डीजल की कीमत से इतनी परेशानी नहीं हो रही थी, जितनी हड़ताल से हुई।

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क्रॉसिंग से पुराने बस अड्डे तक पैदल पहुंचे पर्यटक

क्रॉसिंग से लेकर पुराने बस अड्डे तक बसों में भारी भीड़ होने के कारण पर्यटकों को पैदल ही पहुंचना पड़ा। भारी सामान को उठाकर लोग पैदल पुराने बस स्टैंड और मालरोड पहुंचे।

Posted By: Jagran