जागरण संवाददाता, शिमला : सिरमौर जिला के शिलाई उपमंडल के अनुसूचित जाति के नेता, समाजसेवी एवं अधिवक्ता केदार सिंह जिन्दान की हत्या के मामले में आइजीएमसी के शव गृह के बाहर शनिवार देररात धरना दिया। परिजनों ने सीआइडी व अन्य एजेंसी से मामले की जाच करवाने की गुहार लगाई। उन्होंने सिरमौर पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा करते हुआ कहा कि हत्या को सड़क हादसे में बदलने का प्रयास किया जा रहा है।

शनिवार देर रात तक परिजनों सहित शव गृह के बाहर करीब 100 लोग मौजूद थे। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस मामले को दबाने का प्रयास कर रही है। पुलिस ने बिना शिनाख्त शव का पोस्टमार्टम करवाया और चोरी-छिपे इसे सिरमौर ले जाने की फिराक में थी। पुलिस पोस्टमार्टम के बाद परिजनों की मौजूदगी के प्रमाण पत्र पर हस्ताक्षर लेने पहुंची, लेकिन उन्होंने इससे मना कर दिया। फिर पुलिस ने शव को चुपचाप शव गृह से बाहर निकाला। इस पर परिजनों सहित मौजूद लोग पुलिस के विरोध में नारेबाजी शुरू कर दी। लोगों का कहना था कि जब तक आरोपितों को पुलिस पकड़ नहीं लेती तब तक अंतिम संस्कार नहीं करेंगे। ठियोग के विधायक राकेश सिंघा समेत अनेक लोग देर रात तक आइजीएमसी के शव गृह के बाहर डटे थे।

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एसपी सिरमौर व पुलिस कर्मियों के निलंबन की मांग

गुस्साए लोगों ने पीड़ित परिवार को न्याय की माग को लेकर प्रदेशभर में चक्काजाम करने की चेतावनी भी दी है। लोगों का कहना है कि सिरमौर के एसपी सहित दोषी पुलिस कर्मियों को तुरंत प्रभाव से निलंबित किया जाए और मामले की जाच सीआइडी को सौंपी जाए, जिससे निष्पक्ष जाच हो सके और न्याय मिल सके।

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मुख्यमंत्री आवास का करेंगे घेराव

देर रात तक गुस्साए लोग शव गृह के बाहर जमे हुए थे। प्रदेश सरकार और पुलिस के खिलाफ जमकर नारेबाजी की जा रही थी। लोग शव को मुख्यमंत्री के सरकारी आवास के बाहर ले जाकर धरना प्रदर्शन करने की तैयारी में थे।

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पुलिस मुख्यालय के बाहर किया प्रदर्शन

राज्य ब्यूरो, शिमला : केदार सिंह जिंदान की हत्या को लेकर संत रविदास धर्मसभा ने प्रदेश पुलिस मुख्यालय के बाहर धरना देकर न्याय की गुहार लगाई। जिन्दान की पत्नी लता ने शनिवार को प्रदेश पुलिस मुख्यालय में अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक अनुराग गर्ग के माध्यम से प्रदेश पुलिस महानिदेशक को ज्ञापन सौंपा। इसमें सीआइडी व अन्य जांच एजेंसी से जांच की मांग की। सिरमौर पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा करते हुआ कहा कि हत्या के इस मामले को सड़क हादसे का रूप देने का प्रयास किया जा रहा है। जिंदान की पत्‍‌नी लता ने आरोप लगाया है कि उसके पति की निर्ममता से रॉड और सरियों से हत्या कर गाड़ी के नीचे कुचल कर हत्या कर दी गई। 25 साल से जिन्दान अनुसूचित जाति के लोगों के मामलों को उठा रहे थे। बीपीएल चयन में धांधली को उठाने के कारण उनके पति और परिवार को जान से मारने की धमकियों मिल रही थी। पांच दिन पहले ही वह बकरास घर पर आए थे।

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प्रदेश उच्च न्यायालय से लगाई न्याय की गुहार

शिमला नागरिक सभा के अध्यक्ष विजेंद्र मेहरा ने केदार सिंह जिन्दान की हत्या को लेकर प्रदेश सरकार से दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माग की है। हत्या को हादसे का रूप देने की कोशिश की जा रही है, ताकि दोषियों को बचाया जा सके। प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायधीश से अपील की है कि वह इस मामले का स्वत: संज्ञान लें। प्रदेश सरकार व पुलिस प्रशासन को चेताया है कि अगर दोषियों को बचाने की कोशिश की गई तो सभी समाजसेवी व दलित संगठन मिलकर सड़कों पर उतर आएंगे। पुलिस प्रशासन पर आरोप लगाया है कि जब उसे केदार जिन्दान पर लगातार हमलों की जानकारी थी तो फिर उन्हें सुरक्षा क्यों नहीं दी गई।

Posted By: Jagran