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3800 मीटर की ऊंचाई पर मिला समुद्र तटों का मेहमान, किन्नौर में पहली बार दर्ज हुआ पैसिफिक गोल्डन प्लोवर

Published: Fri, 23 Oct 2026 02:13 PM (GMT+05:30)

किन्नौर के कल्पा में समुद्र तल से 3800 मीटर की ऊंचाई पर पहली बार पैसिफिक गोल्डन प्लोवर पक्षी देखा गया है।

किन्नौर में पहली बार दर्ज हुआ पैसिफिक गोल्डन प्लोवर (जागरण फोटो)

किन्नौर में पहली बार दर्ज हुआ पैसिफिक गोल्डन प्लोवर (जागरण फोटो)


HighLights

  1. कल्पा में 3800 मीटर पर दिखा पैसिफिक गोल्डन प्लोवर

  2. महेश नेगी और हिमांशु चौधरी ने किया अभिलेखन

  3. हिमाचल की पक्षी विविधता में जुड़ा नया रिकॉर्ड

राज्य ब्यूरो, शिमला। समुद्र तटों और आर्द्रभूमियों से जुड़ा प्रवासी पक्षी अब हिमाचल के ऊंचे पहाड़ों में भी अपनी मौजूदगी दर्ज करा रहा है।

किन्नौर जिले के कल्पा क्षेत्र में समुद्र तल से लगभग 3800 मीटर की ऊंचाई पर पैसिफिक गोल्डन प्लोवर पहली बार अभिलेखित किया गया है। बीते पांच अक्टूबर को एक घास के मैदान में छोटी जलधारा के किनारे दिखे इस पक्षी की मौजूदगी ने किन्नौर की समृद्ध, लेकिन अब तक पूरी तरह अन्वेषित नहीं हुई पक्षी विविधता की ओर ध्यान खींचा है।

प्रकृतिविद महेश नेगी रोनसेरू और हिमांशु चौधरी ने पुणे से आए पक्षी प्रेमियों चंद्रकांत भगवत, सुधाकर कुलकर्णी और श्रीराम टकले के साथ पक्षी अवलोकन के दौरान इसे देखा। यह अपरिपक्व पक्षी था।

इसकी पहचान पंखों की बनावट, अपेक्षाकृत लंबी टांगों और शरीर के निचले हिस्से के रंग समेत कई विशिष्ट शारीरिक लक्षणों के आधार पर की गई। अक्टूबर में इस पक्षी का दिखना उसके दक्षिण की ओर होन वाले मौसमी प्रवास के अनुरूप है।

3800 मीटर की ऊंचाई पर दिखा यह पक्षी

आम तौर पर तटीय क्षेत्रों और आर्द्रभूमियों से जोड़े जाने वाले इस प्रवासी पक्षी का 3800 मीटर की ऊंचाई पर मिलना बताता है कि प्रवास के दौरान ऊंचे पर्वतीय घास के मैदान और छोटी जलधाराएं भी उसके लिए महत्वपूर्ण पड़ाव हो सकते हैं।

हिमाचल में इस प्रजाति के पहले रिकॉर्ड पौंग बांध क्षेत्र से मिले हैं। मई 2026 में डॉ. अभिनव चौधरी ने भी इसका उल्लेख किया था। लाहुल-स्पीति के ट्रांस-हिमालयी क्षेत्रों से भी इस प्रजाति के रिकॉर्ड उपलब्ध हैं। ऐसे में किन्नौर में इसकी मौजूदगी राज्य में इसके वितरण और प्रवास संबंधी जानकारी को और विस्तार देती है।

अनछुए क्षेत्रों में छिपे हैं जैव विविधता के सुराग

कल्पा निवासी प्रकृतिविद महेश नेगी रोनसेरू का मानना है कि किन्नौर के कई क्षेत्रों का अभी वैज्ञानिक दृष्टि से व्यवस्थित अध्ययन नहीं हुआ है। नियमित सर्वेक्षण और पक्षी अवलोकन से यहां पक्षियों और अन्य वन्यजीवों के नए रिकॉर्ड सामने आ सकते हैं।

इससे क्षेत्र की जैव विविधता को समझने, संरक्षण प्रयासों को मजबूत करने और प्रकृति पर्यटन की संभावनाएं तलाशने में मदद मिल सकती है।

किन्नौर में पैसिफिक गोल्डन प्लोवर का यह पहला अभिलेखित रिकॉर्ड केवल एक नई प्रजाति की मौजूदगी दर्ज करने तक सीमित नहीं है। यह संकेत भी है कि हिमालय के दुर्गम क्षेत्रों में व्यवस्थित खोज और वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण से प्रकृति के कई अनदेखे पहलू सामने आ सकते हैं।