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हिमाचल में सरकारी नौकरियों का बड़ा खुलासा, एक लाख से अधिक पद खाली; सरकार ने हाई कोर्ट में बताए आंकड़े

Published: Sat, 15 Aug 2026 10:03 AM (IST)

हिमाचल प्रदेश सरकार ने हाई कोर्ट में बताया कि राज्य के विभिन्न विभागों में 1,07,466 सरकारी पद खाली हैं। कोर्ट ...और पढ़ें

एक लाख से अधिक पद खाली; सरकार ने हाई कोर्ट में बताए आंकड़े (File Photo)

एक लाख से अधिक पद खाली; सरकार ने हाई कोर्ट में बताए आंकड़े (File Photo)

HighLights

  1. हिमाचल में 1,07,466 सरकारी पद खाली हैं।

  2. हाई कोर्ट ने आउटसोर्स भर्ती टेंडर पर सवाल उठाए।

  3. सरकार ने भर्ती प्रक्रिया तेज करने का दावा किया।

विधि संवाददाता, शिमला। हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट में आउटसोर्स भर्तियों को लेकर चल रही सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने हिमाचल में सरकारी नौकरियों का आंकड़ा सार्वजनिक किया है।

सरकार द्वारा अदालत में पेश किए ताजा आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश के विभिन्न सरकारी विभागों में इस समय एक लाख से भी अधिक पद खाली हैं। मुख्य न्यायाधीश जीएस संधावालिया और न्यायाधीश विपिन सी नेगी की खंडपीठ के समक्ष सरकार ने यह आधिकारिक डाटा शपथपत्र के जरिए प्रस्तुत किया है।

इसी मामले से जुड़ी एक अन्य याचिका की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने आउटसोर्सिंग के जरिए स्टाफ नसों की भर्ती के टेंडर में पारदर्शिता की कमी पर भी सख्त रुख अपनाया है।

107466 पद खाली हैं

कोर्ट में पेश किए आंकड़ों के अनुसार विभिन्न विभागों में स्वीकृत पद 3,36,542 हैं। इनमें से भर्ती नियमों के तहत वर्तमान में 2.28,891 पदों पर कर्मचारी तैनात हैं। इस समय 1,07,466 पद खाली हैं, जिन्हें भरा जाना बाकी है।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान में 14,619 लोगों को आउटसोर्स माध्यम से काम पर लगाया है। सरकार ने बताया कि एक जनवरी 2023 से लेकर अव तक भर्ती प्रक्रियाओं में तेजी लाई है।

साढ़े तीन साल में भर्ती नियमों के अनुसार सीधे तौर पर 10,989 पद भरे हैं और लोक सेवा आयोग व हिमाचल प्रदेश राज्य चयन आयोग के माध्यम से 12,004 पदों पर नियुक्तियां की हैं।

इस याचिका के साथ स्टाफ नर्स भर्ती मामले के साथ जुड़ी एक अन्य याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने आउटसोर्स आधार पर 60 स्टाफ नर्सों की भर्ती के लिए दी गई टेंडर मंजूरी पर सवाल उठाए हैं।

अदालत ने क्या कहा?

अदालत ने कमेटी की बैठक की कार्यवाही के रिकॉर्ड का संज्ञान लेते हुए कहा कि टेंडर प्रक्रिया में शामिल अन्य दावेदार कंपनियों को बाहर करने का कोई वैध और स्पष्ट आधार बैठक के व्योरे में नहीं दिखाई देता।

किस आधार पर अन्य दावेदारों को अयोग्य ठहराकर एक विशेष कंपनी के पक्ष में मांग तय की गई, यह रिकार्ड में स्पष्ट नहीं है। इस विसंगति को देखते हुए हाई कोर्ट ने राज्य सरकार के वकील को इस टेंडर प्रक्रिया के संबंध में एक अतिरिक्त शपथपत्र दायर करने के आदेश दिए हैं।

याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने सरकार द्वारा पेश किए इन नए शपथपत्रों और आंकड़ों का अध्ययन करने के लिए कोर्ट से समय मांगा है। कोर्ट ने इस टेंडर विवाद और मुख्य आउटसोर्स भर्ती मामले से जुड़ी सभी याचिकाओं को एक साथ जोड़ते हुए अगली सुनवाई आल सितंबर को निर्धारित की।