राज्य ब्यूरो, शिमला : केंद्र सरकार ने मंडी में प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के निर्माण का रास्ता निकालने के लिए ऑब्सेकटल लिमिटेशन सरफेस (ओएलएस) सर्वेक्षण करवाने को मंजूरी दी है। इससे पता चलेगा कि हवाई अड्डे के लिए आसपास किसी प्रकार की अड़चन तो नहीं है। इसकी रिपोर्ट आने के बाद हवाई अड्डे के निर्माण की औपचारिकता पूरी होगी।

नई दिल्ली में केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री से मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की मुलाकात के दौरान सुरेश प्रभु ने सर्वेक्षण के लिए स्वीकृति दी। इस दौरान पवन हंस कंपनी को हिमाचल में उड़ान द्वितीय चरण के तहत चंडीगढ़-शिमला, शिमला-धर्मशाला, शिमला-कुल्लू के बीच हेलीकॉप्टर सेवा शुरू करने के निर्देश दिए गए। प्रदेश के तीनों हवाई अड्डों के बेहतर प्रबंधन के लिए टॉस्क फोर्स गठित होगी, जो दो माह के भीतर रिपोर्ट देगी। प्रदेश में हवाई सेवाओं का विस्तार करने के लिए जयराम ठाकुर ने केंद्रीय मंत्री से मंडी में हवाई अड्डे की आधारशिला रखने के लिए औपचारिकताओं को शीघ्र पूरा करने का आग्रह किया। मुख्यमंत्री ने बताया कि मंडी में हवाई अड्डे से पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। मनाली और आसपास के क्षेत्रों के प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों तक सैलानी आसानी से पहुंच सकेंगे। प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए राज्य सरकार विशेष कार्य बल के सृजन के लिए मुख्य सचिव और अतिरिक्त मुख्य सचिव पर्यटन को नामांकित करेगी। यह मंत्रालय द्वारा नामाकित किए गए दो अधिकारियों के साथ रोज समन्वय के साथ शीघ्र स्वीकृतियों के लिए मुद्दों पर चर्चा करेंगे। मुख्यमंत्री व केंद्रीय मंत्री को साप्ताहिक रिपोर्ट दी जाएगी।

इस दौरान कांगड़ा हवाई अड्डे के विस्तार के मामले पर भी चर्चा हुई। केंद्रीय मंत्री को अवगत करवाया कि उड़ान-दो परियोजना में तेजी लाने के लिए केंद्र के सहयोग की आवश्यकता है। इसके लिए राज्य के अन्य हवाई अड्डों का उपयोग करने की अनुमति के लिए भी आग्रह किया। सुरेश प्रभु ने मुख्यमंत्री द्वारा उठाए गए अन्य मुद्दों के शीघ्र समाधान के लिए अधिकारियों को निर्देश दिए। मुख्यमंत्री के प्रधान निजी सचिव विनय सिंह तथा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी भी बैठक में उपस्थित रहे।

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