राज्य ब्यूरो, शिमला। मंडी जिला के करसोग की सेरी कतांडा बीट के वनरक्षक होशियार सिंह की मौत के मामले में सीबीआइ जांच में नया खुलासा हुआ है। सूत्रों के अनुसार जांच में हत्या होने के सुबूत नहीं मिले हैं। अब इस बात पर भी पेंच फंसा है कि यह मामला आत्महत्या के लिए उकसाने का भी था या नहीं? इस सिलसिले में जांच एजेंसी तफ्तीश रिपोर्ट की कानूनी पड़ताल कर रही है। ऐसे पुख्ता सुराग नहीं मिले हैं जिनके आधार पर कहा जा सके कि होशियार सिंह को आत्महत्या करने के लिए उकसाया गया हो। जांच इसी पहलू पर केंद्रित हो गई है।

अगर कानूनन अड़चन आई तो फिर उस सूरत में क्लोजर रिपोर्ट भी तैयार हो सकती है। इसी से जुड़े अवैध वन कटान के दो मामलों की जांच पूरी हो चुकी है। इसमें से एक मामले में तीन आरोपितों की गिरफ्तारियां हुई थीं। ये तीनों आरोपित कोर्ट से जमानत पर हैं। पिछले साल जून में होशियार सिंह की संदिग्ध हालत में मौत हुई थी। पुलिस को नौ जून को उसका पेड़ से उल्टा लटका शव बरामद हुआ था।

पहले पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज किया। अगले दिन इसे आत्महत्या के लिए उकसाने की धारा में तबदील किया गया था। इससे क्षेत्र के लोग भड़क गए थे। उन्होंने सड़कों पर उतर पर पुलिस के खिलाफ प्रदर्शन किया था। हाईकोर्ट के आदेश पर सीबीआइ की शिमला ब्रांच ने 26 अक्टूबर को तीन केस दर्ज किए थे। इनमें दो केस वन कटान और एक हत्या का था। पांच जून को शिक्षक पवन के घर में सुबह वनरक्षक ने चावल, दाल, स्लाद, आलू मिक्स आदि का भोजन किया। यह भोजन आठ बजकर 45 मिनट से पहले किया गया। शव नौ जून को मिला था जिसका 10 जून को पोस्टमार्टम हुआ था। इस दौरान यह भोजन पेट में ही पाया गया था। पांच जून को ही दोपहर एक बजकर 17 मिनट पर वनरक्षक ने अपनी दादी को अंतिम कॉल की थी। तब वह मौका-ए-वारदात के नजदीक ही रहा होगा।