शिमला, यादवेन्द्र शर्मा। हिमाचल सरकार शिशु मृत्यु दर को 14 से 10 फीसद से भी नीचे लाने के लिए प्रयासरत है, लेकिन मेडिकल कॉलेज ही इसके लिए गंभीर नहीं हैं। नाहन और मंडी मेडिकल कॉलेज (नेरचौक) प्रबंधन नवजात बच्चों के इंटेंसिव केयर यूनिट (आइसीयू) चलाने को ही तैयार नहीं हैं। अतिरिक्त मुख्य सचिव स्वास्थ्य आरडी धीमान ने दोनों मेडिकल कॉलेजों के प्रबंधन को फटकार लगाई है और जल्द नवजात बच्चों के लिए आइसीयू बनाने के आदेश दिए हैं।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय इन आइसीयू पर नजर रख रहा है। यहां दाखिल बच्चों की रिपोर्ट रोज स्वास्थ्य मंत्रालय को देनी होती है। एसीएस ने कहा है कि क्या इतने बडे़ नाहन मेडिकल कॉलेज को नवजात की जान बचाने को चार बच्चों के यूनिट की जगह नहीं मिल रही है। बच्चों के आइसीयू से प्रदेश में शिशु मृत्यु दर 25 से 14 फीसद पर पहुंचाई है। इसे अब 10 फीसद से भी नीचे पहुंचाने का लक्ष्य है। प्रदेश में नवजात बच्चों के चल रहे 13 आइसीयू में दाखिल हर बच्चे पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय नजर रखता है।

बच्चे के दाखिल होने और हर दिन उसकी स्वास्थ्य की स्थिति की जानकारी ऑनलाइन केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को भेजी जाती है। प्रदेश में 13 अस्पतालों व मेडिकल कॉलेजों में बच्चों के आइसीयू में 151 बिस्तर की सुविधा है। इनमें हर वर्ष 10 हजार बीमार नवजात बच्चों में से साढ़े नौ हजार बच्चों को बचाया जाता है।

किस नवजात को रखा जाता है आइसीयू में

  • समय से पहले पैदा हुए।
  • कम वजन वाले।
  • पैदा होने के समय जो रोये नहीं।
  • सांस लेने में तकलीफ।
  • संक्रमित जैसे पीलिया या अन्य बीमारी से ग्रसित।

नाहन और मंडी के मेडिकल कॉलेजों में नवजात बच्चों के आइसीयू शुरु करने के आदेश दिए गए हैं। ताकि नवजात की मृत्यु दर में कमी लाई जा सके और उस क्षेत्र के लोगों को सुविधा उपलब्ध हो सके।

-आरडी धीमान, अतिरिक्त मुख्य सचिव स्वास्थ्य।

क्या-क्या सुविधाएं

  • वेंटिलेटर जिसमें सांस लेने में तकलीफ पर बच्चों को रखा जाता है।
  • सी-पेप यानी निरंतर सकारात्मक वायु दवाब उपकरण।
  •  टेंपरेचर मेंटेनेंस।
  •  वार्मर उपकरण।
  •  पीलिया के उपचार को फोटोथैरेपी मशीन।         

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Posted By: Babita kashyap

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