शिमला, जेएनएन। हिमाचल प्रदेश में अब सरकार का खजाना शराब व टोल टैक्स से भरेगा। पर्यटन राज्य हिमाचल में सभी स्टार श्रेणी के होटलों के साथ बार मध्य रात्रि दो बजे तक खुले रख सकेंगे। अभी तक रात एक बजे तक होटल व बार खुले रखने की अनुमति थी। प्रदेश में दोपहर 12 बजे से रात दो बजे तक होटलों व बार में शराब पीने की इजाजत होने से सरकार को अब अधिक राजस्व प्राप्त होगा। हिमाचल में शराब की बिक्री से सरकार को सबसे ज्यादा कर मिलता है।

सचिवालय शिमला में सोमवार को मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की अध्यक्षता में हुई प्रदेश मंत्रिमंडल की बैठक में सरकार ने नई आबकारी (शराब) नीति और टोल टैक्स नीति को स्वीकृति प्रदान की। नई आबकारी नीति में शराब सस्ती होगी। अगले वित्त वर्ष में शराब की बिक्री से सरकार को 1840 करोड़ रुपये का राजस्व मिलेगा जो मौजूदा वित्त वर्ष की तुलना में 13.2 फीसद की वृद्धि के साथ 215 करोड़ रुपये अधिक होगा। वर्तमान में शराब की बिक्री से सरकार को 1625 करोड़ रुपये प्राप्त हो रहे हैं।

शराब ठेकेदारों के लिए राहत की बात यह है कि उनके लिए 30 फीसद देशी शराब उठाने की शर्त रखी गई है। शेष 70 फीसद शराब का कोटा ठेकेदार इच्छानुसार उठा सकेंगे। संपत्ति के दस्तावेजों को गारंटी के तौर पर लेने की व्यवस्था को सरकार ने खत्म कर दिया है। अब इसकी जगह शराब ठेकेदार को एफडीआर के साथ-साथ बैंक गारंटी देनी होगी। टोल टैक्स से 106 करोड़ की आय टोल टैक्स नीति के तहत राज्य को अगले वित्त वर्ष में करीब 106 करोड़ की आय होगी।

यह आय पिछले वर्ष की तुलना में 9.5 करोड़ रुपये अधिक है। मौजूदा वित्त वर्ष में 95 करोड़ रुपये का कर टोल से प्राप्त हो रहा था। दस फीस वृद्धि टोल टैक्स में की गई है। जिन लोगों के पास टोल बैरियर थे, वे एक फीसद टोल संशोधन फीस चुकाकर अगले वित्त वर्ष में भी बैरियर ठेके पर ले सकते हैं। राज्यपाल के अभिभाषण को मंजूरी बजट सत्र के दौरान राज्यपाल के अभिभाषण को मंत्रिमंडल ने मंजूरी प्रदान की। इसके अलावा कुछ पदों को भरने का भी निर्णय लिया। स्वर्ण जयंती राज्यत्व दिवस के लिए कमेटी वर्ष 2021 में हिमाचल अस्तित्व के 50 साल पूरे कर रहा है।

इसके लिए मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की अध्यक्षता में स्वर्ण जयंती राज्यत्व दिवस मनाने के लिए कमेटी गठित करने का निर्णय लिया गया। वैट के लंबित तीन लाख मामले निपटेंगे आबकारी एवं कराधान विभाग मूल्य वर्धित कर (वैट) के पुराने लंबित तीन लाख मामलों का निपटारा करेगा। ऐसा वन टाइम सेटलमेंट पॉलिसी के तहत होगा। सरकार ने वैट के तहत लटके हुए 700 करोड़ रुपये से जुड़े मामलों के लिए लिगेसी पॉलिसी लाकर रास्ता निकाला है।

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