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मनरेगा से वीबी-जी राम जी योजना में बदलाव के बाद ग्राम रोजगार सेवकों को नहीं मिला मानदेय, पंचायतों में अटक सकता है काम

By Digital Desk Edited By: Rajesh Sharma
Published: Sun, 13 Sep 2026 12:31 PM (IST)

हिमाचल प्रदेश में मनरेगा से वीबी-जी राम जी योजना में बदलाव के कारण 1023 ग्राम रोजगार सेवकों का मार्च से जून 2026 तक का मानदेय अटक गया है।

ग्राम रोजगार सेवकों काे मानदेय नहीं मिला है। प्रतीकात्मक फोटो

ग्राम रोजगार सेवकों काे मानदेय नहीं मिला है। प्रतीकात्मक फोटो

HighLights

  1. 1023 ग्राम रोजगार सेवकों का मार्च-जून 2026 का मानदेय लंबित।

  2. मनरेगा से वीबी-जी राम जी योजना में बदलाव के कारण देरी।

  3. केंद्र से 20.50 करोड़ रुपये का बजट अभी तक जारी नहीं।

यादवेन्द्र शर्मा, शिमला। हिमाचल की 3758 पंचायतों में मनरेगा के कामकाज को गति देने वाले 1023 ग्राम रोजगार सेवकों (जीआरएस) का चार माह का मानदेय अटक गया है। मनरेगा बंद होने और पहली जुलाई से नई योजना वीबी-जी राम जी शुरू होने के बीच मार्च से जून 2026 तक का मानदेय नहीं मिला है। 30 जून तक केंद्र से प्रशासनिक मद के 20.50 करोड़ रुपये बकाया थे, जो अभी तक जारी नहीं हुए हैं।

भुगतान में देरी से जीआरएस को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि, जुलाई से नई योजना के तहत उन्हें मानदेय मिल रहा है।

केंद्र से नहीं आया बजट, प्रदेश सरकार ने भी नहीं दिया

मनरेगा की प्रशासनिक मद से जीआरएस का वेतन 100 प्रतिशत केंद्र सरकार वहन करती थी। केंद्र सामान्य तौर पर प्रशासनिक मद की राशि चार किस्त में जारी करता है। 30 जून तक बकाया 20.50 करोड़ रुपये में जीआरएस के मानदेय के अलावा प्रशासनिक मद के अन्य खर्च भी शामिल थे। प्रदेश सरकार ने भी अपने फंड से भुगतान नहीं किया। विभाग की ओर से केंद्र से राशि जारी करने के लिए 12 बार पत्राचार किया जा चुका है।

नई योजना में नए सिरे से नियुक्ति

पहली जुलाई 2026 से इन्हें वीबी-जी राम जी में शामिल किया गया है। उन्हें 50 हजार रुपये मासिक मानदेय पर नए सिरे से नियुक्त किया गया है। ये कर्मचारी वर्ष 2008 से सेवाएं दे रहे हैं। नई व्यवस्था के तहत वर्तमान और पूर्व सरकारों की ओर से वित्तीय लाभों संबंधी जारी अधिसूचनाएं निरस्त कर दी गई हैं। अब पहली जुलाई से मानदेय नई योजना के तहत दिया जा रहा है।

12 पत्र भेजे, फिर भी इंतजार

विभाग के अनुसार केंद्र से प्रशासनिक मद की राशि जारी करवाने के लिए 12 बार पत्राचार किया गया है। 30 जून तक 20.50 करोड़ रुपये बकाया होने के कारण मानदेय जारी नहीं हो सका। केंद्र के समक्ष मामला उठाया गया है और जल्द राशि जारी होने की उम्मीद है।

परिवार चलाना मुश्किल

मार्च से जून तक मानदेय नहीं मिलने से परिवारों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। मुख्यमंत्री से मुलाकात के दौरान उन्होंने अपने बजट से भुगतान करने का आश्वासन दिया था। जीआरएस गांवों में मनरेगा कार्यों की निगरानी, मजदूरों की उपस्थिति, मस्टररोल और आनलाइन प्रविष्टियों समेत कई जिम्मेदारियां निभाते हैं। उन्होंने लंबित मानदेय जल्द जारी करने की मांग की है।
-शिवराज ठाकुर, अध्यक्ष, प्रदेश ग्राम रोजगार सेवक संघ।

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