शिमला, राज्य ब्यूरो। हिमाचल प्रदेश के विधायक चाहते हैं कि होटलों में ठहरने के लिए मिलने वाला 7,500 रुपये खर्च अलग रखा जाए। हर विधायक को होटल में ठहरने के लिए दैनिक किराया मिलता है। विधायक को सालाना ढाई लाख रुपये मुफ्त यात्रा करने के लिए मिलते हैं। होटल का किराया ढाई लाख के पैकेज में शामिल है। इस कारण विधायकों को नुकसान हो रहा है।

विधायकों ने सरकार से मांग उठाई है कि होटल किराया को अलग किया जाए। संभावना है कि तपोवन में होने वाले विधानसभा के शीतकालीन सत्र में सरकार विधायकों की इस मांग को पूरा कर सकती है। वहीं, प्रदेश के 150 पूर्व विधायक चाहते हैं कि सरकार बढ़ती महंगाई को देखते हुए उनकी पेंशन बढ़ाए। पूर्व विधायक को न्यूनतम 85 हजार रुपये मासिक पेंशन मिल रही है। एक बार शपथ हो गई तो उसके बाद पांच साल तक विधायक रहें या नहीं, पूर्व विधायक ताउम्र पेंशन के लिए पात्र हो जाते हैं। विधायक या पूर्व विधायक की मृत्यु होने पर उनकी पत्नी या नाबालिग बच्चे को पेंशन मिलती है। दूसरी बार विधायक बनने पर हर साल 1000 रुपये की दर से पेंशन बढ़ती है। सामान्य प्रशासन विभाग के पास इस तरह का मांगपत्र पहुंचा है। देखना यह है कि लोकसभा चुनाव के मद्देनजर विधायकों व पूर्व विधायकों की मांगों पर मुहर लगती है या नहीं।

7,500 रुपये दैनिक होटल किराया

विधायक प्रदेश से बाहर यात्रा करते हुए किसी भी होटल में ठहर सकते हैं। सरकार की ओर से उन्हें 7,500 रुपये दैनिक होटल किराया देने की व्यवस्था है। लेकिन विधायकों को यह राशि प्रति वर्ष मिलने वाले ढाई लाख के पैकेज में शामिल रहती है। सरकार ने यह व्यवस्था वर्ष 2017 में की थी।

85 हजार रुपये है मासिक पेंशन

वर्ष 1971 में बने हिमाचल प्रदेश विधानसभा भत्ते एवं पेंशन अधिनियम में विधायकों के लिए पांच हजार रुपये की मासिक पेंशन का प्रावधान किया गया था। कई संशोधनों के बाद बेसिक पेंशन 22 हजार रुपये और उसके बाद 36 हजार रुपये हुई। पूर्व विधायकों की बेसिक पेंशन 36 हजार रुपये है जिस पर 140 प्रतिशत महंगाई भत्ता मिलता है। मासिक पेंशन 85 हजार रुपये बनती है। यह पेंशन पहली बार बने विधायक को प्राप्त होती है। 

Posted By: Babita