शिमला, अजय बन्याल। कांग्रेस की पार्षद मीरा शर्मा ने नगर निगम शिमला से पार्षद के पद से इस्तीफा दे दिया है। हालांकि इस्तीफा देने के पीछे निजी कारण बताया है, लेकिन सूत्रों के अनुसार मीरा शर्मा ने ग्रेटर वाटर शिमला सर्किल कंपनी के तहत सोशल मोबलाइजर के पद के लिए आवेदन किया है। उक्त पोस्ट के लिए तीन आवेदन और आए हैं। सूत्रों के मुताबिक उक्त पद पर मासिक वेतन 50 हजार रुपये के करीब है, लेकिन अभी तक इन आवेदनों में से एक पर भी मुहर नहीं लगी है। जून में आवेदन मांगे थे।  

अगस्त में आवेदनों पर फैसला नहीं हो पाया है, लेकिन कांग्रेस की पार्षद मीरा शर्मा के इस्तीफे के बाद राजनीतिक चर्चाएं काफी शुरू हो गई हैं। पार्षदों को इस बात की सूचना ही नहीं है कि उन्होंने नगर निगम के तहत प्राइवेट कंपनी में आवेदन किया है, लेकिन वहीं अब मीरा शर्मा के बाद नगर निगम में सांगटी वार्ड में दोबारा चुनाव करने पड़ेंगे। पार्षद के एक फैसले के कारण लाखों रुपये का खर्च चुनाव पर आएगा। इसके साथ ही शहर में विकास कार्यो पर चुनावी प्रक्रिया से विराम लगेगा। हैरानी तो इस बात की है कि नगर निगम के पार्षद ने नौकरी के लिए आवेदन कर दिया। अभी पार्षद मीरा शर्मा का कार्यकाल केवल डेढ़ वर्ष ही हुआ था। साढ़े तीन वर्ष का कार्यकाल शेष रह गया था।

दो बार चुनी गई पार्षद वर्ष 2007 में मीरा शर्मा पहली बार पार्षद के पद पर चुनाव लड़कर विजयी हुई थी। वर्ष 2012 में एमसी में चुनाव हार गई थीं। फिर सीपीआइएम पार्टी से इस्तीफा दे दिया था। 2017 में कांग्रेस के प्रत्याशी के तौर पर सांगटी वार्ड से चुनाव जीतकर दूसरी बार एमसी पहुंची।

मैं परिवार को समय नहीं दे पा रही थी। वहीं, बेटे की पढ़ाई भी बाधित हो रही थी। मैंने कहीं भी आवेदन नहीं किया है।

-मीरा शर्मा, पार्षद कांग्रेस।

सोशल मोबाइलजर के लिए आवेदन जून में मांग गए थे। करीब चार आवेदन आए हैं। अभी आवेदन पर अंतिम मुहर नहीं लगी है। ये आवेदन कंपनी के तहत मांगे थे। -धमेंद्र गिल, एसई ग्रेटर शिमला वाटर सर्किल।