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'5 मिनट में तबाही मचा सकती है घेपन ग्लेशियल लेक', 14 KM की कठिन चढ़ाई कर मौके पर पहुंची DC लाहुल ने बताई हकीकत

By Digital Desk Edited By: Rajesh Sharma
Published: Wed, 23 Sep 2026 02:56 PM (IST)Updated: Wed, 23 Sep 2026 03:33 PM (IST)

लाहुल-स्पीति में घेपन ग्लेशियल झील के बढ़े जलस्तर से संभावित आपदा जोखिम को देखते हुए जिला प्रशासन अलर्ट हो गया ...और पढ़ें

घेपन ग्लेशियल लेक पर पहुंची लाहुल स्पीति की उपायुक्त व अन्य टीम।

घेपन ग्लेशियल लेक पर पहुंची लाहुल स्पीति की उपायुक्त व अन्य टीम।

HighLights

  1. घेपन ग्लेशियल झील के बढ़े जलस्तर से आपदा का जोखिम।

  2. DC लाहुल ने झील का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया।

  3. पानी 5 मिनट में आबादी तक, प्रभावी निकासी योजना पर जोर।

जागरण संवाददाता, केलंग। हिमाचल प्रदेश के जिला लाहुल-स्पीति में घेपन ग्लेशियल झील के बढ़े हुए जलस्तर से उत्पन्न संभावित आपदा जोखिम को देखते हुए जिला प्रशासन अलर्ट हो गया है। उपायुक्त एवं अध्यक्ष जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण लाहुल-स्पीति किरण भड़ाना ने स्वयं सिस्सु से लगभग 14 किलोमीटर ऊपर दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र में स्थित घेपन झील का दौरा कर मौके पर स्थिति का विस्तृत जायजा लिया। निरीक्षण के बाद लौटी टीम ने स्थिति ज्यादा खतरनाक बताई है।

जिला प्रशासन पहले से ही झील की निगरानी तथा संभावित ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड जोखिम को लेकर विभिन्न स्तरों पर तैयारियां कर रहा है।

उपायुक्त किरण भड़ाना ने स्वयं झील तक पहुंचकर वहां की वास्तविक स्थिति को समझा। उन्होंने झील के जलस्तर, आसपास के भू-भाग तथा पानी के संभावित बहाव मार्ग का मौके पर अवलोकन किया। साथ ही उन्होंने अधिकारियों के साथ इस बात पर भी विचार-विमर्श किया कि बढ़े हुए जलस्तर को नियंत्रित अथवा कम करने के लिए व्यावहारिक एवं सुरक्षित उपाय क्या हो सकते हैं और ऐसी किसी भी संभावित स्थिति में किस प्रकार की कार्ययोजना अपनाई जा सकती है।

टीम ने समझी परिस्थितियां

इस दौरान उपायुक्त ने मौके पर मौजूद अधिकारियों एवं कर्मचारियों से झील की वर्तमान स्थिति तथा स्थल की भौगोलिक परिस्थितियों के संबंध में जानकारी भी प्राप्त की। उन्होंने संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करने तथा झील से संबंधित प्रत्येक महत्वपूर्ण तथ्य एवं संभावित जोखिम का वैज्ञानिक एवं तकनीकी दृष्टि से आकलन करने पर जोर दिया।

4070 मीटर की ऊंचाई पर है झील

घेपन झील लगभग 4,070 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है और जिला प्रशासन द्वारा इसके जलस्तर एवं अन्य महत्वपूर्ण मानकों की निरंतर निगरानी को प्राथमिकता दी जा रही है। हाल के दिनों में प्रशासन ने झील से जुड़े संभावित जोखिमों को देखते हुए वैज्ञानिक अध्ययन, निगरानी और प्रारंभिक चेतावनी व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में भी कार्य किया है। भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) की विशेषज्ञ टीम भी झील एवं इसके आसपास के क्षेत्र का अध्ययन कर चुकी है। 

लगातार निगरानी की जाएगी सुनिश्चित

उपायुक्त किरण भड़ाना ने कहा कि घेपन झील के आसपास बड़ी संख्या में ग्लेशियर व पर्वत मौजूद हैं, जिनकी स्थिरता की नियमित निगरानी अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि पिछले माह नेपाल में हुई त्रासदी ने भी ग्लेशियरों की अस्थिरता से उत्पन्न संभावित खतरों की गंभीरता को रेखांकित किया है। ऐसे में घेपन झील के आसपास स्थित ग्लेशियरों तथा पर्वतीय क्षेत्रों की स्थिरता का समय-समय पर वैज्ञानिक आकलन एवं निगरानी सुनिश्चित करने के लिए राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण तथा राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के साथ समन्वय स्थापित किया जाएगा।

22 नहीं 5 मिनट में पहुंच सकता है आबादी क्षेत्र में पानी

उन्होंने बताया कि विभिन्न स्तरों पर अब तक किए गए आकलनों के अनुसार, यदि किसी आपदा की स्थिति में झील का पानी अचानक नीचे की ओर आता है, तो उपलब्ध प्रारंभिक आकलन में लगभग 22 मिनट में भारी मात्रा में पानी आबादी वाले क्षेत्र तक पहुंचने की संभावना जताई गई है। हालांकि, मौके पर भौगोलिक एवं व्यावहारिक परिस्थितियों को देखते हुए प्रशासन का आकलन है कि पानी इससे कहीं कम समय में, लगभग पांच मिनट के भीतर भी आबादी वाले क्षेत्रों तक पहुंच सकता है।

प्रभावी निकासी योजना तैयार होगी

उन्होंने कहा कि इस संभावित जोखिम को देखते हुए आपदा प्रबंधन प्राधिकरण को संवेदनशील क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए प्रभावी निकासी योजना तैयार करने, नियमित जागरूकता एवं मॉक ड्रिल आयोजित करने तथा त्वरित प्रतिक्रिया व्यवस्था को और मजबूत करने पर विशेष ध्यान देना होगा। उन्होंने कहा कि समय रहते लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की स्पष्ट एवं व्यावहारिक व्यवस्था सुनिश्चित कर संभावित आपदा के प्रभाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

अर्ली वार्निंग सिस्टम

उपायुक्त ने बताया कि जिला प्रशासन द्वारा घेपन झील में अर्ली वार्निंग सिस्टम स्थापित करने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है। प्रस्तावित प्रणाली का उद्देश्य झील के जलस्तर सहित महत्वपूर्ण मानकों की लगातार निगरानी कर वास्तविक समय में जानकारी उपलब्ध करवाना तथा किसी संभावित खतरे की स्थिति में समय रहते चेतावनी जारी करने में सहायता करना है। सी-डैक तिरुवनंतपुरम द्वारा विकसित प्रणाली का सिस्सु झील में परीक्षण भी किया जा चुका है। 

बेस कैंप में रुकी टीम

निरीक्षण दल में विभिन्न विभागों के कुल 15 अधिकारी एवं कर्मचारी शामिल रहे। यह टीम झील क्षेत्र तक पहुंची और वहां आवश्यक निरीक्षण एवं जानकारी जुटाने का कार्य किया। अत्यधिक दुर्गम क्षेत्र होने के कारण टीम के अन्य सदस्यों के लिए झील के नीचे बेस कैंप में रात्रि विश्राम किया। उपायुक्त किरण भड़ाना मंगलवार को ही निरीक्षण के उपरांत वापस लौट आईं, जबकि टीम के अन्य सदस्यों के बुधवार दोपहर बाद तक केलंग लौटी।

ये रहे शामिल

घेपन झील जाने वाली इस टीम में उपायुक्त किरण भड़ाना के साथ परियोजना अधिकारी, आईटीडीपी अश्वनी कुमार शर्मा, उप वन क्षेत्रपाल लीला मणि, चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुषमा, डॉ. विक्रांत नेगी, प्रभारी अधिकारी, बीआरओ 94 आरसीसी कैप्टन हरिओम शरण, लीडिंग फायरमैन, प्रभारी अग्निशमन केंद्र केलंग रतन चंद, होमगार्ड फायरमैन छेरिंग आंगरुप, कनिष्ठ कार्यालय सहायक, आईटीडीपी कार्यालय अजीत सिंह, कनिष्ठ अभियंता जल शक्ति विभाग पंकज महाजन, पंप अटेंडेंट जलशक्ति विभाग केलंग अरविंद कुमार, वरिष्ठ सहायक एचपीएसईबीएल संजय कुमार, कनिष्ठ सहायक रोबिन, वनरक्षक बलवीर सिंह व निजी सुरक्षा अधिकारी उपायुक्त ईश्वर दास शामिल रहे।

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