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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 03, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

कोटखाई मामला: सीबीआइ ने मांगे तीन माह हाईकोर्ट का इंकार

By Babita KashyapEdited By:
Published: Thu, 03 Aug 2017 09:41 AM (IST)

सीबीआइ ने बुधवार को कोटखाई प्रकरण की जांच करने वाले पुलिस अधिकारियों से जांच का पूरा ब्योरा लिया।

कोटखाई मामला: सीबीआइ ने मांगे तीन माह हाईकोर्ट का इंकार
कोटखाई मामला: सीबीआइ ने मांगे तीन माह हाईकोर्ट का इंकार

शिमला, जागरण संवाददाता। कोटखाई में दसवीं की छात्रा की दुष्कर्म के बाद हत्या के मामले में सीबीआइ ने अभी तक की स्टेटस रिपोर्ट प्रदेश हाईकोर्ट के समक्ष सीलबंद लिफाफे में पेश की। सीबीआइ ने कोर्ट से आग्रह किया कि जांच को गोपनीय रखते हुए रिपोर्ट को सार्वजनिक न किया जाए। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजय करोल

व न्यायाधीश संदीप शर्मा की खंडपीठ ने सीबीआइ के इस वक्तव्य के बाद इस रिपोर्ट को खोलने से इन्कार करते हुए इसे रजिस्ट्रार जनरल की कस्टडी में रखने का आदेश दिया।

 

कोर्ट ने सीबीआइ से पूछा कि और कितने समय में इस मामले की जांच पूरी कर ली जाएगी। सीबीआइ ने जांच पूरी करने के लिए कोर्ट से तीन माह का अतिरिक्त समय मांगा, लेकिन कोर्ट ने इन्कार कर दिया। कोर्ट ने सीबीआइ की रिपोर्ट को बिना देखे सील्ड कवर में रजिस्ट्रार जनरल के सुपुर्द करते हुए दो सप्ताह के भीतर अगली जांच रिपोर्ट दायर करने को कहा। मामले पर सुनवाई 17 अगस्त को होगी। हाईकोर्ट ने इस मामले की जांच का जिम्मा सीबीआइ को सौंपते हुए एसआइटी का गठन करने का आदेश दिया था जिसमें एसपी व डीएसपी रैंक के तीन अधिकारी रखने को कहा गया था। कोर्ट ने प्रदेश सरकार को निर्देश दिए थे कि वह मामले की जांच में सीबीआइ की हर संभव सहायता करे और सरकार द्वारा गठित एसआइटी ने मामले में जो भी सुबूत इक_े किए हैं, उन्हें सीबीआइ को सौंप दे।

 

वहीं, सीबीआइ ने बुधवार को कोटखाई प्रकरण की जांच करने वाले पुलिस अधिकारियों से जांच का पूरा ब्योरा लिया। किस आधार पर आरोपियों को हिरासत में लिया, मामले के दौरान कौन से साक्ष्य सबसे पहले कब्जे में लिए गए व पुलिस को आरोपियों से पूछताछ के दौरान जो भी तथ्य मिले, उनकी भी पूरी जानकारी जुटाई गई।

 

सीबीआइ के वकील ने नहीं देखी थी जांच रिपोर्ट 

मामले की सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से पेश महाधिवक्ता श्रवण डोगरा ने मांग की कि सीबीआइ को कम से कम यह पूछा जाए कि अभी तक उनकी जांच किस नतीजे पर पहुंची है ताकि जनता इस जांच के संबंध में कुछ जानकारी हासिल कर सके। सीबीआइ के वकील ने खुद ही जांच रिपोर्ट नहीं देखी थी। इस कारण वह जांच केसंबंध में कोर्ट को कुछ भी नहीं बता पाए। हालांकि सीबीआइ के वकील ने आइंदा से ऐसा न दोहराने की बात करते हुए अगली बार कोर्ट को इस मामले की जांच से संतुष्ट करवाने की बात कही।

 

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