राज्य ब्यूरो, शिमला : फसल विविधिकरण प्रोत्साहन प्रोजेक्ट का दूसरा चरण जल्द आरंभ होगा। इसका पहला चरण करीब पूरा हो गया है। यह प्रोजेक्ट 1104 करोड़ रुपये का होगा। इसे जून में स्वीकृति के लिए केंद्र के माध्यम से जापान सरकार को भेजा गया था। अब जापान अंतरराष्ट्रीय कॉरपोरेशन एजेंसी (जाईका) टोकियो के उपनिदेशक ताकुमी कुनिताके की अगुवाई में मिशन टीम ने हिमाचल का दौरा किया है। प्रदेश में दूसरा चरण जाईका के सहयोग से चलेगा। कुनिकाते ने बताया कि सभी जिलों में दूसरे चरण को लागू करने की औपचारिकताएं पूरी कर ली जाएंगी। इस दल में उनके साथ सोता कोइदे सह निदेशक दक्षिण एशिया व मारिया वातानाबे प्रतिनिधि जाईका भारत कार्यालय भी आए हैं। टीम ने मुख्य सचिव डॉ. श्रीकांत बाल्दी से इस परियोजना के दूसरे चरण के बारे में चर्चा की गई। प्रोजेक्ट के आए हैं बेहतर नतीजे

मुख्य सचिव ने कहा कि इस परियोजना के अच्छे परिणाम सामने आये हैं। किसानों की पैदावार बढ़ी है और सब्जी उत्पादन से उनकी आय में भी बढ़ोतरी हुई है। किसानों की भागीदारी सुनिश्चित की गई है। वे सिचाई स्कीमों का संचालन स्वयं कर रहे हैं। उन्होंने अनुरोध किया कि प्रथम चरण पूर्ण होने से पहले चरण दो की मंजूरी दी जाए, ताकि प्रशिक्षित कर्मचारियों के अनुभव का फेज दो में सदुपयोग किया जा सके।

टीम ने बताया कि इस मिशन की रिपोर्ट के बाद जापान सरकार दूसरे चरण के बारे में निर्णय लेगी। उसके बाद एक मिशन और आएगा। यह दूसरे चरण की डीपीआर का विस्तृत अध्ययन करेगा। उसके बाद ऋण का सहमति पत्र भारत व जापान सरकार के बीच हस्ताक्षरित किया जाएगा। इस मौके पर निदेशक कृषि डॉ. राकेश कोंडल, मुख्य परियोजना सलाहकार डॉ. जेसी राणा, परियोजना निदेशक डॉ. विनोद शर्मा भी उपस्थित थे। चार जिलों का दौरा किया

इस टीम ने प्रथम चरण के अंतर्गत पांच जिलों में से बिलासपुर, हमीरपुर, कांगड़ा और मंडी का दौरा किया। इस दौरान प्रोजेक्ट के प्रभावों का निरीक्षण करने पर यह बात सामने आई है कि जाईका ने परियोजना क्षेत्र में फसलों की पैदावार और किसानों की आय बढ़ाने में सकारात्मक प्रभाव डाला है।

Posted By: Jagran

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