शिमला, महेंद्र ठाकुर। राजधानी से 40 किलोमीटर दूर सरकार व जिला प्रशासन के दावों की पोल खुल रही है। यहां पर बच्चों का स्कूल पहुंचना किसी चुनौती से कम नहीं है। पाहल पंचायत के टभोग गांव से घैणी तक का सफर स्थानीय लोग व स्कूल बच्चे जान जोखिम में डालकर करने को मजबूर हैं। यहां पर बरसात में पानी के बहाव के साथ खड्ड पर बने पुल बह चुके हैं।

अब हालत यह है कि लोगों को बस लेनी हो या फिर बच्चों को स्कूल छोड़ना हो, खड्ड पार कर ही जाना पड़ता है। कई बच्चों को तो पीठ पर उठाकर खड्ड पार करवानी पड़ती है। कहीं पर पेड़ के सहारे नदी पार की जा रही है। सुबह के समय तो अभिभावक ऑफिस के समय बच्चों को खड्ड पार करवा देते हैं लेकिन दोपहर को छुट्टी के समय बच्चे एक-दूसरा का सहारा बनते हुए खड्ड को पार करते हैं। हैरानी की बात है कि सरकार व प्रशासन की ओर से यहां पर कोई कदम नहीं उठाए जा रहे  हैं। टबोभ गांव के बाशिंदों के लिए बस लेने, घराट तक आने या बच्चों को स्कूल छोड़ने के लिए खड्ड को पार करना जरूरी है।

स्थानीय निवासी सुरेश ठाकुर, कपिल ठाकुर, जयचंद, भूपेंद्र, बालकृष्ण, पूर्ण सिंह, चेतराम और राकेश ने कहा कि इस मामले को लेकर उपायुक्त शिमला से भी मिले थे, लेकिन अभी तक कोई रास्ता नहीं बन पाया है। लोगों ने बताया कि वे आज भी अपने बच्चे पीठ पर लाद कर स्कूल पहुंचाते हैं। बच्चों को खड्ड पार करवाने के लिए स्कूल तक जाना अनिवार्य है। बच्चों के घर न पहुंचने तक उनकी चिंता सताती है। एक सप्ताह भारी बारिश के कारण स्कूल से छुट्टी ही करवानी पड़ी थी। 

एसडीएम को राहत दिलाने के दिए हैं निर्देश : उपायुक्त

उपायुक्त अमित कश्यप ने कहा कि इस मामले में एसडीएम ग्रामीण को जिम्मा सौंपा है कि वे शीघ्र ही पुल बनवाने के लिए विभाग को निर्देश जारी करने के निर्देश दें।  शीघ्र ही लोगों को राहत मिल सके, इसके लिए लोक निर्माण विभाग या अन्य एजेंसीको जल्द ही काम करने के निर्देश जारी किए जाएंगे। 

यहां बने थे पहले पुल

लक्कड़ बाजार से लेकर पगोग, रूलदूभट्टा सहित एक तरफ का पूरे शिमला का पानी नया सेर खड्ड से होकर बसंतपुर पहुंचता है। इसे पार करने के लिए प्रशासन या स्थानीय पंचायतों के माध्यम से चार पुल बना रखे थे। 2018 में सबसे पहले टभोग में बना पुल बह गया। लोगों ने विकल्प के तौर पर झोलो, मकरेणा, दायला में बने पुलों का इस्तेमाल शुरू कर दिया। आपातकाल के लिए लकड़ी का पुल भी तैयार किया। इस बरसात में सभी पुल बह गए हैं, अब लोग मजबूरन पीठ या फिर पेड़ के सहारे पुल पार कर रहे हैं। 

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बारिश में बह गए थे पुल

भारी बारिश के दौरान एक पुल पिछले साल बह गया था, वहीं एक पुल इस बार बरसात के दौरान खड्ड से बह गया है। इस कारण आम लोगों को मजबूरन खड्ड पार करते समय दुघर्टना का भय सताता रहता है। घर पर जब तक बच्चे नहीं आते हैं, उनकी चिंता अभिभावकों के चेहरे पर साफ दिखाई देती है।

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Posted By: Babita kashyap

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