राज्य ब्यूरो, शिमला : हिमाचल प्रदेश अधीनस्थ सेवाएं चयन बोर्ड हमीरपुर के पूर्व अध्यक्ष एसएम कटवाल के कारनामों की सूची लंबी है। आरोप है कि वह बोर्ड के अन्य सदस्यों की मिलीभगत से भर्तियों में धांधली करते थे।

तत्कालीन राज्य विजिलेंस एवं प्रवर्तन निदेशालय की जांच के मुताबिक पुलिस से लेकर विद्या उपासक की भर्ती में साक्षात्कार के अंकों के साथ छेड़छाड़ हुई। वर्ष 1998 से 2003 के बीच पूर्व भाजपा सरकार के कार्यकाल में अधीनस्थ सेवाएं चयन बोर्ड में भ्रष्टाचार का मामला सामने आया था। सत्ता बदलाव के बाद वीरभद्र सरकार ने बोर्ड के तत्कालीन अध्यक्ष एसएम कटवाल के खिलाफ जांच के आदेश दिए थे। विजिलेंस एवं प्रवर्तन निदेशालय ने जांच में पाया था कि सब इंसपेक्टरों की भर्ती में बड़े पैमाने पर धांधली हुई थी। विजिलेंस सूत्रों के अनुसार विद्या उपासक की भर्ती में लिखित परीक्षा में टॉपर लड़की को साक्षात्कार में एक अंक भी नहीं दिया गया। उसके परीक्षा में 60 में से 58 अंक आए थे। अगर उसे एक अंक भी दिया होता तो वह चयनित हो जाती। लेकिन उसे जीरो अंक दिया गया। इससे वह शिक्षक बनने से वंचित रह गई। राज्य विजिलेंस की टीम ने अपनी इन्क्वायरी में आरोपों को सही पाया था। इसी तरह टीजीटी आ‌र्ट्स, मेडिकल व नॉन मेडिकल की भर्तियों में भी साक्षात्कार में दिए गए अंकों के साथ छेड़छाड़ की गइ थी।

तीन महीने में जला देते थे रिकॉर्ड

बोर्ड में भर्तियों से जुड़ा रिकॉर्ड तीन महीने के भीतर जला दिया जाता था। इससे कई अहम सुबूत नष्ट हो जाते थे। करीब 15 साल पहले विजिलेंस ने रातोंरात बोर्ड के कार्यालय में छापे मारे थे। तब प्रदेश में सत्ता परिवर्तन हुआ था। उस दौरान सारा रिकॉर्ड कब्जे में लिया गया था। वीरभद्र सीडी मामले को दी चुनौती

एसएम कटवाल ने वीरभद्र सिंह के सीडी मामले में निचली अदालत के फैसले को भी हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। वीरभद्र निचली अदालत से बरी हो गए थे। हालांकि कटवाल को कोई राहत नहीं मिली।

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