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Himachal News: व्यक्ति के गले में जा फंसी जिंदा जोंक, 15 दिन से परेशान मरीज को शिमला IGMC में मिली राहत

By Shikha Verma Edited By: Rajesh Sharma
Published: Sat, 31 Jan 2026 05:58 PM (IST)Updated: Sat, 31 Jan 2026 06:22 PM (IST)

शिमला के आईजीएमसी अस्पताल में डॉक्टरों ने एक व्यक्ति के गले से 15 दिन से फंसी जिंदा जोंक को सफलतापूर्वक ...और पढ़ें

HighLights

  1. शिमला IGMC डॉक्टरों ने गले से जिंदा जोंक निकाली।

  2. 15 दिन से फंसी जोंक से मरीज था परेशान।

  3. ब्रोंकोस्कोपी और सक्शन से जोंक सुरक्षित बाहर आई।

जागरण संवाददाता, शिमला। आइजीएमसी अस्पताल शिमला के डॉक्टरों ने गले में घूम रही जोंक से परेशान व्यक्ति को 20 मिनट में राहत दे दी। 15 दिन से व्यक्ति की सांस की नली के पास फंसी हुई जोंक को आईजीएमसी के डाक्टरों ने जिंदा निकाल लिया। परेशान मरीज पहले एमएमयू सोलन में उपचार के लिए गया था।

डाक्टरों की टीम को डायरेक्ट लैरिंगोस्कोपी के दौरान व्यक्ति के गले में एक हिलती-डुलती वस्तु दिखी। इसके बाद एमएमयू सोलन से मरीज को आइजीएमसी शिमला रेफर किया गया। आइजीएमसी के आपातकालीन विभाग में मरीज का इलाज किया गया। पहले मरीज को ईएनटी विभाग के डाक्टरों ने देखा था।

गले में सांस की नली के पास चिपकी थी जोंक

डाक्टरों के पास जोंक को निकालने के उपकरण न होने पर मरीज को पल्मनरी विभाग के डाक्टरों के पास भेजा। उन्होंने ब्रोंकोस्कोपी की तो पता चला कि जोंक व्यक्ति के गले में सांस की नली के पास चिपकी हुई थी। इसे काटने या पकड़ने में खतरा था कि कुछ हिस्सा अंदर न रह जाए या फिर गिर न जाए। इसके बाद सक्शन के माध्यम से मरीज के गले से जिंदा जोंक निकाल ली गई।

इन डॉक्टरों की टीम ने किया ऑपरेशन

इस ऑपरेशन टीम का नेतृत्व डा. डिंपल के. भगलानी  ने किया। इसके साथ डा. राघव निरुला, डा. मयूर बग्गा, डा. निशांत और डा. कुमार सौरव शामिल रहे। इस दौरान तकनीकी सहयोग सुभाष बाली और अर्चना ने दिया। डॉक्टरों के अनुसार समय रहते उपचार मिलने से मरीज की जान बचाई जा सकी। मरीज की हालत स्थिर बताई जा रही है।

15 दिन से परेशान था सिरमौर का मरीज

डा. डिंपल के. भगलानी ने बताया कि आइजीएमसी अस्पताल में शुक्रवार को जिला सिरमौर के पच्छाद क्षेत्र के कांगेर धारयार गांव निवासी 55 वर्षीय सुरेश दत्त को रेफर किया गया था। मरीज की आवाज में बदल गई थी। मरीज को लग रहा था कि उसके गले में कुछ फंसा है। जोंक 15 दिन से अंदर फंसी थी। कटने के डर से डाक्टरों की टीम ने सक्शन के माध्यम से जिंदा जोंक को बाहर निकाला। 

कैसे पहुंची गले में जोंक

मरीज को घर भेज दिया गया है। स्वजन के मुताबिक सुरेश ने किसी नाले का पानी पिया था और इस दौरान ही शायद जोंक उसके गले में प्रवेश कर गई।

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