जागरण संवाददाता, शिमला : हिमाचल पथ परिवहन निगम की 2003 में हुई कंडक्टर भर्ती मामले में हस्ताक्षरों को पुष्टि के लिए शिमला पुलिस ने जुन्गा फॉरेंसिक लैब के लिए भेज दिया है। पुलिस ने तत्कालीन एमडी सहित पांच अधिकारियों के हस्ताक्षर वेरिफिकेशन को भेजे हैं। पुलिस ने भर्ती के दौरान साक्षात्कार पैनल के हस्ताक्षर जांच के लिए भेजे हैं। यदि किसी अधिकारी के हस्ताक्षर नहीं मिलते तो भर्ती के लिए फर्जी हस्ताक्षर करने के मामले में पैनल के अन्य अधिकारी फंसेंगे। यदि हस्ताक्षर मिलते हैं तो नतीजे से छेड़छाड़ करने के मामले में फंस जाएंगे। इसमें तत्कालीन एमडी के साथ चार डिविजनल मैनेजर (डीएम) भी शामिल हैं।

एचआरटीसी में 2003 में कांग्रेस सरकार के समय में 300 कंडक्टरों की भर्ती हुई थी। इस भर्ती में गड़बड़ी के साक्ष्य शिमला पुलिस को मिले हैं। पुलिस ने इस मामले की पुष्टि के लिए इनके हस्ताक्षरों की फॉरेंसिक जांच करवानी है। अब केवल इन अफसरों के हस्ताक्षरों के नमूनों की फॉरेंसिक जांच रिपोर्ट का इंतजार है। रिपोर्ट आते ही एसआइटी चार्जशीट तैयार कर कोर्ट में दाखिल करेगी। डीएसपी शिमला दिनेश शर्मा ने बताया कि इस मामले में फॉरेंसिक जांच के लिए हस्ताक्षर भेजे हैं। इसमें पांच तत्कालीन अधिकारियों के हस्ताक्षर शामिल हैं। कब हुआ था भर्तियों का फैसला

24 अक्टूबर 2003 को एचआरटीसी के तत्कालीन निदेशक मंडल की बैठक में कंडक्टरों के 300 पद भरने को मंजूरी दी गई। 20 सितंबर 2004 को 300 की जगह 365 पद भर दिए। 12 मई 2005 को 13 और पद भर दिए गए। इसी बीच भर्ती विवादों में आ गई। कोर्ट के आदेश पर शिमला पुलिस ने 14 मार्च 2017 को तत्कालीन एमडी, डीएम समेत पांच अधिकारियों को आरोपी बनाकर सदर थाने में एफआइआर दर्ज की। इसके बाद एसआइटी का गठन हुआ।

Posted By: Jagran

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