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'कानूनी अड़चन होगी तो अलग बात', पंचायत चुनाव पर CM सुक्खू का बड़ा बयान, रोस्टर पर क्यों दी DC को शक्तियां?

By Anil Thakur Edited By: Rajesh Sharma
Published: Wed, 01 Apr 2026 05:02 PM (IST)

हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने विधानसभा में घोषणा की कि राज्य में पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव ...और पढ़ें

हिमाचल प्रदेश विधानसभा में पंचायत चुनाव पर बयान देते सीएम सुखविन्द्र सिंह सुक्खू।

हिमाचल प्रदेश विधानसभा में पंचायत चुनाव पर बयान देते सीएम सुखविन्द्र सिंह सुक्खू।

HighLights

  1. पंचायत चुनाव 31 मई से पहले होंगे।

  2. उपायुक्तों को आरक्षण रोस्टर बदलने की शक्ति।

  3. ओबीसी जनसंख्या संतुलन हेतु यह बदलाव।

राज्य ब्यूरो, शिमला। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने बुधवार को विधानसभा में एलान किया कि राज्य में पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव 31 मई से पहले करवाए जाएंगे। इसमें यदि कोई कानूनी अड़चन होगी तो अलग बात है, मगर सरकार 31 मई तक चुनाव करवा लेगी। पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव की प्रक्रिया के तहत सरकार द्वारा जिला उपायुक्तों को आरक्षण रोस्टर में 5 फीसदी बदलाव की शक्तियां देने को लेकर विपक्ष के विरोध का उत्तर मुख्यमंत्री ने शायराना अंदाज में दिया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं, मेरी कोशिश है व्यवस्था बदलनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि संविधान हमें आरक्षण का अधिकार देता है। रोस्टर जारी करना राज्य सरकार का अधिकार है।

वर्ष 2010 में ओबीसी श्रेणी के लिए आरक्षण लागू किया गया जो कि वर्ष 1990-95 के सर्वेक्षण के आधार पर था। तब की जनगणना को इसमें आधार माना गया था। 

सीएम ने बताया क्यों दी उपायुक्त को शक्तियां

कई पंचायतों में ओबीसी का आरक्षण दिया गया है, मगर वहां पर ओबीसी की जनसंख्या ही नहीं है। ऐसे में दूसरे वर्ग प्रभावित हो रहे हैं। ऐसे मामलों में सरकार ने फैसला लिया है कि रोस्टर में बदलाव के लिए उपायुक्तों को 5 फीसदी बदलाव की शक्तियां दी जाएं, ताकि वो दूसरे वर्गों के साथ न्याय कर सकें। इसमें कुछ भी गलत नहीं है।

उन्होंने कहा कि सालों से चली आ रही व्यवस्था को हम बदलना चाहते हैं ताकि सभी के साथ न्याय हो। मुख्यमंत्री ने कहा कि हम व्यवस्था परिवर्तन कर रहे हैं और सेवा भाव से काम कर रहे हैं, मगर विपक्ष राजनीतिक रोटियां सेंकने की कोशिश कर रहा है।

यह भी दिया तर्क

मुख्यमंत्री ने कहा कि दिसंबर महीने में स्कूलों में परीक्षाएं थी, ऐसे में पंचायती राज संस्थाओं के चुनाव करवाना ठीक नहीं था। सभी अध्यापक इस चुनावी ड्यूटी में लग जाते। अप्रैल महीने में कालेजों की परीक्षाएं होती है। सरकार ने खुद मई में चुनाव करवाने का शपथ पत्र दिया है। उन्होंने कहा कि जहां जिलाधीश देखेंगे कि विशेष वर्ग की जनसंख्या नहीं है तो वहां पर रोस्टर का बदल सकते हैं। वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर ही चुनाव करवाए जा रहे हैं।

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