विधि संवाददाता, शिमला : प्रदेश उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को आदेश जारी किए हैं कि जो जुवेनाइल व अनाथ आश्रमों में रहने वाले बच्चे 18 साल की आयु पूरी कर चुके हैं, के पुनर्वास के लिए नीति बनाए। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजय करोल व न्यायाधीश संदीप शर्मा की खंडपीठ ने सचिव सामाजिक न्याय को आदेश जारी किए हैं कि वह अनाथ बच्चों व जुवेनाइल के लिए स्थापित किए गए संस्थानों का निरीक्षण करें और उनको संरक्षण देने बाबत प्रबंध करें। इसके अलावा चंबा में जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड की सिटींग के लिए सदस्यों की संख्या में बढ़ोतरी करने के आदेश जारी किए गए है। साथ ही इन संस्थानों का सोशल ऑडिट करने के आदेश जारी किए गए है। उन्हें व्यावसायिक प्रशिक्षण देने बाबत छह प्रशिक्षण संस्थानों में शिक्षक तैनात करने के आदेश जारी किए गए है। इन संस्थानों में रिक्त पड़े अधिकक्षकों व वार्डन के पदों को भरने के आदेश जारी किए गए है।

उल्लेखनीय है कि उच्चतम न्यायालय द्वारा बच्चों के संरक्षण व उन्हें सक्षम बनाने के लिए प्रशिक्षण देने के लिए निर्देश जारी किए गए हैं। राज्य सरकार की ओर से न्यायालय को बताया गया कि जो बच्चे 18 साल से अधिक की आयु पूरी कर चुके हैं उनको वोकेशनल ट्रेनिंग, बीटेक और दूसरी शैक्षणिक डिग्री कोर्सेस करवाए जा रहे हैं। 848 बच्चों को उनके पुनर्वास के लिए तैयार कर लिया गया है 115 बच्चों ने सरकारी नौकरी सुरक्षित कर ली गई है। 713 बच्चों ने निजी क्षेत्र में नौकरी सुरक्षित कर ली गई है। जबकि 20 बच्चे खुद का व्यवसाय करने में सक्षम हो गए हैं। मामले पर सुनवाई 20 सितंबर को निर्धारित की गई है।

Posted By: Jagran