'टेक होम सैलरी से PF कटौती नहीं की जा सकती', हिमाचल हाई कोर्ट ने एंबुलेंस कर्मियों के पक्ष में सुनाया अहम फैसला
हिमाचल हाई कोर्ट ने 108/102 एंबुलेंस कर्मियों के पक्ष में फैसला सुनाया है कि 'टेक होम सैलरी' से पीएफ और ईएसआई जैसी वैधानिक कटौती नहीं की जा सकती।

हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट का शिमला परिसर। जागरण आर्काइव
HighLights
हाई कोर्ट ने 'टेक होम सैलरी' पर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया।
पीएफ, ईएसआई कटौती 'टेक होम सैलरी' का हिस्सा नहीं।
जीवीके कंपनी को बकाया ₹15,000 सैलरी चुकाने का आदेश।
विधि संवाददाता, शिमला। हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने 108 और 102 नेशनल एंबुलेंस सर्विस के पायलटों (चालकों) और इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियनों (ईएमटी) के पक्ष में एक अत्यंत महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि ''टेक होम सैलरी'' का अर्थ कर्मचारी के खाते में आने वाली वास्तविक नकद राशि से है और इसमें भविष्य निधि या ईएसआई जैसी वैधानिक कटौती शामिल नहीं की जा सकती। मुख्य न्यायाधीश जीएस संधावालिया और न्यायाधीश जिया लाल भारद्वाज की खंडपीठ ने पूरन चंद की ओर से दायर निष्पादन याचिका को स्वीकार करते हुए यह आदेश जारी किया।
अदालत ने 8 जनवरी 2020 को एक आदेश जारी कर जीवीके इमरजेंसी मैनेजमेंट एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट को निर्देश दिया था कि वह विवाद का समाधान होने तक अपने प्रत्येक पायलट और ईएमटी की ''टेक होम सैलरी'' को बढ़ाकर ₹15,000 प्रति माह करे। यह आदेश 20 जनवरी 2020 से प्रभावी होना था। हालांकि, कंपनी ने इस ₹15,000 की राशि को ''कॉस्ट टू कंपनी'' मान लिया, जिसके तहत पीएफ, ईएसआई और ग्रेच्युटी जैसी कटौतियों को इसी ₹15,000 के भीतर शामिल कर लिया गया।
इसके चलते एुबुलेंस कर्मचारियों के हाथ में वास्तविक वेतन घटकर लगभग ₹11,545 से ₹12,908 प्रति माह ही रह गया था। कर्मचारियों ने इसके खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाया और मांग की कि उन्हें आदेशानुसार पूरे ₹15,000 इन-हैंड मिलने चाहिए।
इन-हैंड सैलरी का हिस्सा बताकर कटौती नहीं की जा सकती
अदालत की महत्वपूर्ण टिप्पणी और आदेश कंपनी की दलीलों को खारिज करते हुए हाई कोर्ट ने कहा कि ''टेक होम सैलरी'' वह वास्तविक खर्च करने योग्य राशि होती है, जो सभी करों और वैधानिक कटौतियों के बाद कर्मचारी के बैंक खाते में जमा की जाती है। अदालत ने स्पष्ट किया कि कंपनी की ओर से पीएफ या ईएसआई का भुगतान करना उसकी वैधानिक जिम्मेदारी है और इस राशि को कर्मचारी की इन-हैंड सैलरी का हिस्सा बताकर कटौती नहीं की जा सकती।
15000 सैलरी का भुगतान करे कंपनी
खंडपीठ ने आदेश दिया कि जीवीके कंपनी अपने प्रत्येक पात्र कर्मचारी को 20 जनवरी 2020 से लेकर 30 जनवरी 2021 (सक्षम प्राधिकारी द्वारा विवाद का निपटारा किए जाने की तिथि) तक ₹15,000 प्रति माह की पूरी ''टेक होम सैलरी'' का भुगतान सुनिश्चित करे।
अदालत ने इस बकाया राशि का भुगतान करने के लिए कंपनी को दो महीने का समय दिया है। इस फैसले से प्रदेश के सैकड़ों एंबुलेंस चालकों और तकनीकी स्टाफ को बड़ी राहत मिली है, जो लंबे समय से अपने पूर्ण मानदेय के लिए संघर्ष कर रहे थे।
