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'कनेक्शन देना और बाधाएं दूर करना बिजली बोर्ड का कर्तव्य', हिमाचल हाई कोर्ट की टिप्पणी; जिम्मेदारी से नहीं बचा जा सकता

By Rohit Nagpal Edited By: Rajesh Sharma
Published: Mon, 14 Sep 2026 04:59 PM (IST)

हिमाचल हाई कोर्ट ने फैसला सुनाया है कि बिजली कनेक्शन देना और रास्ते की बाधाएं दूर करना बिजली बोर्ड का ...और पढ़ें

हिमाचल हाई कोर्ट ने बिजली बोर्ड को कड़े निर्देश दिए हैं। प्रतीकात्मक फोटो

हिमाचल हाई कोर्ट ने बिजली बोर्ड को कड़े निर्देश दिए हैं। प्रतीकात्मक फोटो

HighLights

  1. बिजली कनेक्शन देना बोर्ड का वैधानिक और अनिवार्य कर्तव्य है।

  2. 'राइट ऑफ वे' बहाना नहीं, बोर्ड को बाधाएं हटानी होंगी।

  3. अदालत ने दो लंबित मामलों में कनेक्शन देने का आदेश दिया।

विधि संवाददाता, शिमला। हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने बिजली उपभोक्ताओं के हित में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि बिजली कनेक्शन जारी करना और लाइन बिछाने में आने वाली बाधाओं को दूर करना बिजली वितरण कंपनी (बोर्ड) का वैधानिक कर्तव्य है। बिजली बोर्ड किसी भी उपभोक्ता को ''राइट ऑफ वे'' यानी रास्ता न दे पाने का बहाना बनाकर बिजली आपूर्ति से वंचित नहीं कर सकता।

यह फैसला न्यायाधीश संदीप शर्मा ने दो अलग-अलग याचिकाओं (दया राम और वीना ठाकुर बनाम एचपी स्टेट बिजली बोर्ड) का निपटारा करते हुए सुनाया। कोर्ट ने कहा कि विद्युत अधिनियम और वर्क्स ऑफ लाइसेंसी रूल्स, 2006 के तहत यदि लाइन बिछाने में कोई बाधा आती है, तो बोर्ड को जिला मजिस्ट्रेट या पुलिस प्रशासन की मदद से उसे दूर करना चाहिए।

शिमला के गलोट गांव का विवाद

एक मामले में शिमला के गलोट गांव में दया राम के मकान के ऊपर से खतरनाक सिंगल-फेज बिजली लाइन गुजर रही थी। बोर्ड ने नई वैकल्पिक लाइन तो बिछा दी थी, लेकिन रास्ते के विवाद के चलते न तो उसे चालू किया और न ही पुराने खंभे हटाए। कोर्ट ने इस याचिका को स्वीकार करते हुए बोर्ड को छह सप्ताह के भीतर नई लाइन को चालू करने और याचिकाकर्ता के घर के ऊपर से पुराने खंभे व तार हटाने का आदेश दिया। 

बोर्ड ने सालों तक कनेकशन नहीं दिया

दूसरे मामले में याचिकाकर्ता वीना ठाकुर ने साल 2013 में थ्री-फेज बिजली कनेक्शन के लिए आवेदन किया था और फीस भी जमा कर दी। इसके बावजूद, अन्य भू-मालिकों के विरोध और ''राइट ऑफ वे'' न मिलने का बहाना बनाकर बोर्ड ने सालों तक कनेक्शन नहीं दिया।

हाई कोर्ट ने बोर्ड की लापरवाही पर नाराजगी जताते हुए आदेश दिया कि छह सप्ताह के भीतर वीना ठाकुर के परिसर में थ्री-फेज कनेक्शन स्थापित किया जाए। 

आवेदन के एक माह में काम करना दायित्व

कोर्ट ने कहा कि बिजली अधिनियम की धारा 43 के तहत आवेदन मिलने के एक महीने के भीतर बिजली देना बोर्ड का अनिवार्य दायित्व है। यदि कोई स्थानीय व्यक्ति कार्य में बाधा डालता है, तो लाइसेंसी (बोर्ड) को कानून के तहत प्रशासन से मदद लेने की पूरी आजादी है। कोर्ट ने कहा कि बिजली बोर्ड अपनी कमियों या तीसरे पक्ष के विरोध का ठीकरा उपभोक्ता पर नहीं फोड़ सकता।

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