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HPTDC मुख्यालय के ट्रांसफर को लेकर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, शिमला से धर्मशाला शिफ्टिंग को मिली हरी झंडी

Published: Fri, 25 Sep 2026 02:57 PM (IST)

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने एचपीटीडीसी के कॉर्पोरेट कार्यालय को शिमला से धर्मशाला स्थानांतरित करने के सरकार के फैसले को चुनौती देने वाली दो याचिकाएं खारिज कर दी हैं।

HPTDC मुख्यालय के ट्रांसफर को लेकर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला (फाइल फोटो)

HPTDC मुख्यालय के ट्रांसफर को लेकर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला (फाइल फोटो)

HighLights

  1. एचपीटीडीसी मुख्यालय शिमला से धर्मशाला स्थानांतरण की याचिकाएं खारिज

  2. हाईकोर्ट ने इसे सरकार का नीतिगत निर्णय बताया

  3. याचिकाकर्ताओं का सेवा संबंध समाप्त,

जागरण संवाददाता, शिमला। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम (एचपीटीडीसी) के कॉरपोरेट कार्यालय को शिमला से धर्मशाला स्थानांतरित करने के सरकार के फैसले को चुनौती देने वाली दो याचिकाएं खारिज कर दी हैं।

अदालत ने कहा कि कार्यालय का स्थान तय करना मुख्य रूप से सरकार का नीतिगत निर्णय है और ऐसे मामलों में अदालत सरकार के फैसले के गुण-दोष की अपील में नहीं बैठ सकती।

16 सितंबर को सुनाया फैसला

मुख्य न्यायाधीश जीएस संधावालिया और न्यायमूर्ति बिपिन चंदर नेगी की खंडपीठ ने 16 सितंबर को यह फैसला सुनाया। एक याचिका सेवानिवृत्त एचपीटीडीसी कर्मचारी दाबे राम और दूसरी सेवानिवृत्त कर्मचारी मुकेश भारद्वाज ने दायर की थी।

दोनों याचिकाओं में शिमला स्थित कॉरपोरेट कार्यालय को होटल कश्मीर हाउस, धर्मशाला में स्थानांतरित करने के फैसले को चुनौती दी गई थी।

सरकार और एचपीटीडीसी की ओर से अदालत को बताया गया कि धर्मशाला-कांगड़ा को 30 अप्रैल 2025 को सरकार ने पर्यटन राजधानी घोषित किया था।

इसके बाद निगम के निदेशक मंडल ने शिमला के बजाय धर्मशाला में अपने भवन में मुख्यालय स्थानांतरित करने के लिए सरकार से मंजूरी लेने का निर्णय लिया था। शिमला में प्रस्तावित वैकल्पिक कार्यालय भवन की योजना को नगर निगम से मंजूरी नहीं मिल सकी थी।

स्थानांतरण का निर्णय नीतिगत विषय

अदालत ने पूर्व के मामलों का हवाला देते हुए कहा कि सरकारी कार्यालय के स्थानांतरण का निर्णय नीतिगत विषय है।

हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ताओं का एचपीटीडीसी से सेवा संबंध समाप्त हो चुका है और वे सेवारत कर्मचारियों के मुद्दे को लेकर याचिका दायर करने के लिए उचित लोकस स्टैंडी नहीं रखते।

दोनों याचिकाएं खारिज करते हुए अदालत ने प्रत्येक याचिकाकर्ता की ओर से जमा 50-50 हजार रुपये की राशि हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट बार एसोसिएशन और हाईकोर्ट स्टाफ वेलफेयर ऑर्गनाइजेशन के बीच बराबर बांटने के आदेश दिए।