हिमाचल हाई कोर्ट का अनुबंध कर्मियों के हक में अहम फैसला, सेवा अवधि को सभी लाभों के लिए गिना जाएगा
हिमाचल हाई कोर्ट ने अनुबंध कर्मचारियों के हित में बड़ा फैसला सुनाया है, जिसमें नियमितीकरण के बाद उनकी पूरी अनुबंध ...और पढ़ें

हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट का परिसर। जागरण आर्काइव
HighLights
अनुबंध सेवा अवधि अब वरिष्ठता, वेतन वृद्धि के लिए मान्य।
'HP सरकारी कर्मचारी अधिनियम, 2024' असंवैधानिक घोषित, रद्द।
बकाया एरियर 31 दिसंबर 2026 तक, अन्यथा ब्याज सहित।
विधि संवाददाता, शिमला। हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने राज्य के कर्मचारियों के हित में एक अत्यंत महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने आदेश दिया है कि नियमितीकरण के बाद कर्मचारियों की पूरी अनुबंध सेवा अवधि को वरिष्ठता, वेतन वृद्धि और अन्य सभी सेवा लाभों के लिए गिना जाएगा। न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश रंजन शर्मा की खंडपीठ ने जूनियर ऑफिस असिस्टेंट व अन्य द्वारा दायर कुल 83 रिट याचिकाओं का एक साथ निपटारा करते हुए यह फैसला सुनाया।
अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि किसी कर्मचारी की शुरुआती नियुक्ति नियमों के तहत तय योग्यता और उचित चयन प्रक्रिया के जरिए हुई है, तो नियमित होने के बाद उसकी अनुबंध सेवा को वरिष्ठता और अन्य लाभों के लिए नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
भर्ती और सेवा शर्तों को लेकर दी थी चुनौती
याचिकाकर्ताओं ने 'हिमाचल प्रदेश सरकारी कर्मचारी (भर्ती और सेवा शर्तें) अधिनियम, 2024' को चुनौती दी थी। अदालत ने पूर्व में दिए गए फैसले को देखते हुए इस अधिनियम को असंवैधानिक और अवैध घोषित करते हुए रद कर दिया है।
अनुबंध सेवा को मिलाकर पदोन्नति दी जाए
अदालत ने बिजली बोर्ड और राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि याचिकाकर्ताओं की अनुबंध सेवा को मिलाकर उनके 7 वर्ष का सेवाकाल पूरा होने पर उन्हें 'सीनियर असिस्टेंट' के पद के लिए योग्य माना जाए और 2024 व उसके बाद की रिक्तियों के आधार पर पदोन्नति दी जाए। अनुबंध अवधि के दौरान की वार्षिक वेतन वृद्धि को काल्पनिक रूप से जोड़कर नियमितीकरण के समय भविष्य का वेतन और पेंशन लाभ तय किया जाएगा।
समय सीमा में भुगतान न किया तो देना होगा ब्याज
कर्मचारियों के बकाया एरियर का भुगतान 31 दिसंबर 2026 या उससे पहले करना होगा। यदि इस समय सीमा के भीतर भुगतान नहीं किया जाता, तो उत्तरदाताओं को 6 फीसद वार्षिक ब्याज देना होगा।
नियमों का हवाला देकर नहीं छीन सकते अधिकार
हाई कोर्ट ने कहा कि जब एक बेरोजगार युवा पहली बार नौकरी ज्वाइन करता है, तो उसके पास विभाग के 'डॉटेड लाइन कॉन्ट्रैक्ट' (एकतरफा समझौते) पर हस्ताक्षर करने के अलावा कोई विकल्प नहीं होता। सफल और निर्बाध अनुबंध सेवा पूरी करने के बाद जैसे ही कर्मचारी नियमित होता है, उसके ये अधिकार स्वतः ही परिपक्व हो जाते हैं, जिन्हें नियमों का हवाला देकर छीना नहीं जा सकता।
