शिमला से 3200 KM दूर ताजिकिस्तान पहुंचेगा हिमाचली आलू का बीज मंत्र, किसानों की बढ़ेगी आमदनी
हिमाचल के शिमला स्थित केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान (CPRI) की उन्नत आलू तकनीक अब ताजिकिस्तान तक पहुंचेगी।

शिमला से ताजिकिस्तान तक पहुंचेगा हिमाचली आलू का बीज मंत्र।
HighLights
CPRI शिमला की आलू तकनीक ताजिकिस्तान तक पहुंचेगी
आलू अनुसंधान और बीज उत्पादन में सहयोग पर चर्चा
एयरोपोनिक्स तकनीक पर विशेष ध्यान दिया जाएगा
राज्य ब्यूरो, शिमला। हिमाचल के शिमला स्थित केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान (सीपीआरआई) की उन्नत आलू तकनीक अब ताजिकिस्तान तक पहुंचने की राह पर है। भारत और ताजिकिस्तान ने आलू अनुसंधान, उत्पादन, गुणवत्तापूर्ण बीज तैयार करने और वैज्ञानिकों के प्रशिक्षण में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की है।
इसको लेकर सीपीआरआई शिमला और ताजिकिस्तान की एलसीसी एकोमा के प्रतिनिधियों के बीच वर्चुअल बैठक हुई। नई दिल्ली स्थित ताजिकिस्तान दूतावास के प्रतिनिधि भी बैठक में शामिल हुए। हिमाचल में विकसित आलू बीज उत्पादन की वैज्ञानिक तकनीक अब अंतरराष्ट्रीय सहयोग का आधार बनने की दिशा में बढ़ रही है।
बैठक में सीपीआरआई के निदेशक डॉ. ब्रजेश सिंह ने भारतीय दल का नेतृत्व किया। दोनों पक्षों ने आलू की उन्नत खेती से लेकर गुणवत्तापूर्ण बीज उत्पादन और मानव संसाधन विकास तक सहयोग की संभावनाओं पर मंथन किया।
सीपीआरआई के वैज्ञानिकों ने भारत में विकसित तकनीकों, अनुसंधान उपलब्धियों और आलू की पूरी मूल्य शृंखला से जुड़ी विशेषज्ञता की जानकारी ताजिकिस्तान के प्रतिनिधियों को दी। भारतीय दल में डॉ. आलोक कुमार, डॉ. जगदेव शर्मा, डॉ. संजीव शर्मा, डॉ. विनोद कुमार, डॉ. सोम दत्त और डॉ. पिनबियांगलांग के. समेत वरिष्ठ वैज्ञानिक शामिल रहे। ताजिकिस्तान की ओर से अलीशेर खोलमातोव, बेखरुज इब्रागिमोव और परविज रहीमजोड सहित दूतावास के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
एयरोपोनिक्स पर खास नजर
सहयोग में सबसे अधिक जोर एयरोपोनिक्स तकनीक से उच्च गुणवत्ता वाले आलू बीज उत्पादन पर रहा। इस तकनीक से बिना मिट्टी के नियंत्रित वातावरण में बीज सामग्री का तेजी से गुणन किया जाता है। ताजिकिस्तान के प्रतिनिधियों ने इस तकनीक और इसकी उत्पादन प्रक्रिया को करीब से समझने में विशेष रुचि दिखाई।
सीपीआरआ आएंगे ताजिक विशेषज्ञ
बैठक में ताजिकिस्तान के प्रतिनिधियों के लिए सीपीआरआई शिमला का एक्सपोजर विजिट आयोजित करने का प्रस्ताव रखा गया। इसके तहत वे एयरोपोनिक्स आधारित बीज उत्पादन, आलू फसल प्रबंधन और संस्थान की आधुनिक अनुसंधान सुविधाओं को प्रत्यक्ष देख सकेंगे। ताजिक कृषि विशेषज्ञों के लिए सीपीआरआई में विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने पर भी चर्चा हुई।
