हिमाचल में खटारा हो चुकी 366 बसें हटेंगी, HRTC में 1000 ई-बसें होंगी शामिल; 250 नई डीजल बसों की खरीद भी तेज
हिमाचल पथ परिवहन निगम (HRTC) अपने पुराने बेड़े को हटाकर 1000 नई इलेक्ट्रिक बसें शामिल करने की तैयारी में है, जिनकी बैटरी रेंज 350 किमी से अधिक होगी।
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HRTC में 1000 ई-बसें होंगी शामिल। फोटो जागरण
HighLights
HRTC 366 पुरानी बसों को हटाकर 1000 नई ई-बसें लाएगा।
नई ई-बसों की बैटरी रेंज 350 किलोमीटर से अधिक होगी, लंबे रूटों के लिए।
कांगड़ा में नया ई-डिपो स्थापित होगा, 250 डीजल बसें भी खरीदी जाएंगी।
राज्य ब्यूरो, शिमला। हिमाचल पथ परिवहन निगम (एचआरटीसी) के पुराने बेड़े की जगह अब लंबी दूरी तय करने वाली इलेक्ट्रिक बसें लेने की तैयारी है। निगम की 366 पुरानी बसों को चरणबद्ध तरीके से सड़कों से हटाया जाएगा और इनके स्थान पर 1000 नई ई-बसें शामिल करने की दिशा में काम तेज कर दिया गया है।
इन ई-बसों की बैटरी रेंज 350 किलोमीटर से अधिक रखने की तैयारी है, जिससे इन्हें प्रदेश के लंबे रूटों पर भी चलाया जा सकेगा। उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने ई-बसों के प्रोटोटाइप को जल्द अंतिम रूप देने के निर्देश दिए हैं।
एचआरटीसी निदेशक मंडल की 164वीं बैठक में बेड़े के बदलाव से लेकर नए रूट और डिपो विकसित करने तक कई महत्वपूर्ण फैसले हुए। निगम के पुराने बेड़े में शामिल जेएनएनयूआरएम की 12 मीटर बसों समेत 366 बसें चरणबद्ध तरीके से हटेंगी। 176 बसें अक्टूबर महीने में ही हटा दी जाएगी। सरकार का जोर अब डीजल बसों के साथ-साथ इलेक्ट्रिक बसों का बेड़ा बढ़ाने पर है।
250 डीजल बसों की खरीद भी जल्द
पुरानी बसों को हटाने के साथ तत्काल जरूरत पूरी करने के लिए 250 नई डीजल बसों की खरीद भी तेज होगी। उपमुख्यमंत्री ने अधिकारियों को 15 दिन के भीतर वाहन खरीद समिति की बैठक बुलाने और खरीद प्रक्रिया आगे बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। यानी निगम के बेड़े में एक साथ डीजल और इलेक्ट्रिक बसों की नई खेप जोड़ने की तैयारी है।
रूट बंद करने पर अब एमडी की मंजूरी जरूरी
एचआरटीसी के रूटों को लेकर भी बैठक में बड़ा फैसला हुआ। क्षेत्रीय प्रबंधक अब अपने स्तर पर कोई बस रूट बंद नहीं कर सकेंगे। किसी भी रूट को बंद करने के लिए प्रबंध निदेशक की मंजूरी अनिवार्य होगी। इससे उन रूटों को अचानक बंद करने पर रोक लगेगी, जिन पर यात्रियों की निर्भरता है।
कांगड़ा में नया ई-डिपो
कांगड़ा में नए इलेक्ट्रिक बस डिपो की स्थापना को मंजूरी दी गई है। इससे पहले नादौन, हरोली, ठियोग और नाहन में ई-डिपो स्वीकृत हो चुके हैं। हरोली ई-डिपो में संचालन शुरू हो गया है। नए डिपो के साथ चार्जिंग ढांचा भी मजबूत किया जाएगा।
जेएनएनयूआरएम के तहत चल रही बसों को एचआरटीसी के अधीन लाने का भी निर्णय हुआ है। इससे निगम इन बसों को हिमाचल से बाहर के रूटों पर भी चला सकेगा।
ऊना में पुराने बस अड्डे पर सिटी सेंटर
ऊना के पुराने बस अड्डे की जगह सिटी सेंटर विकसित किया जाएगा। अधिकारियों को इसकी ड्राइंग और अन्य तैयारियां जल्द पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं, बिलासपुर के मंडी भराड़ी में निर्माणाधीन नया बस अड्डा 15 फरवरी तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
बैठक में एचआरटीसी उपाध्यक्ष अजय वर्मा, अतिरिक्त मुख्य सचिव ओंकार चंद शर्मा, प्रबंध निदेशक शिव प्रताप सिंह सहित निदेशक मंडल के सदस्य और संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
कर्मचारियों की देनदारियों के लिए ऋण लेने पर चर्चा
एचआरटीसी कर्मचारियों की वित्तीय देनदारियों के लिए ऋण लेगा। बीओडी में एचआरटीसी की वित्तीय स्थिति को लेकर प्रेजेंटेशन भी दी गई। जल्द इस पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। एचआरटीसी वैट लीज आधार पर बसें चलाने की तैयारी कर रहा है।
बाहरी राज्यों में इन बसों को नहीं चलाया जा सकता। इसके लिए बीओडी ने निगम प्रबंधन को प्रस्ताव तैयार करने को कहा है ताकि इस योजना को सिरे चढ़ाया जा सकें।
