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हिमाचल के 148 CBSE स्कूलों में शिक्षकों के लिए नया ड्रेस कोड लागू, छात्रों के लिए भी नए सत्र से लागू होगी नई वर्दी

Published: Fri, 02 Oct 2026 08:38 AM (IST)

हिमाचल प्रदेश के 148 सरकारी सीबीएसई स्कूलों में शिक्षकों और प्रधानाचार्यों के लिए एक समान ड्रेस कोड लागू किया गया ...और पढ़ें

हिमाचल के 148 CBSE स्कूलों में शिक्षकों के लिए नया ड्रेस कोड लागू (जागरण फोटो)

हिमाचल के 148 CBSE स्कूलों में शिक्षकों के लिए नया ड्रेस कोड लागू (जागरण फोटो)

HighLights

  1. शिक्षकों के लिए 148 सीबीएसई स्कूलों में ड्रेस कोड लागू

  2. अनुशासन, पेशेवर पहचान और संस्थागत गरिमा बढ़ाना मुख्य उद्देश्य

  3. अगले सत्र से छात्रों की नई वर्दी, 100 और स्कूल सीबीएसई से जुड़ेंगे

राज्य ब्यूरो, शिमला। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) से संबद्ध सरकारी स्कूलों में शिक्षक एक जैसी वर्दी में नजर आएंगे। प्रदेश के 148 सरकारी सीबीएसई स्कूलों में शिक्षकों और प्रधानाचार्यों के लिए निर्धारित ड्रेस कोड वीरवार से लागू हो गया।

विद्यार्थियों के लिए नई वर्दी आगामी शैक्षणिक सत्र से लागू होगी। वहीं, सरकार नए सत्र में 100 और सरकारी स्कूलों को सीबीएसई से संबद्ध कराने की दिशा में काम कर रही है। स्कूल शिक्षा निदेशक आशीष कोहली ने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर ड्रेस कोड लागू किया गया है।

इसका उद्देश्य शिक्षकों में अनुशासन, पेशेवर पहचान और विद्यालय की संस्थागत गरिमा को मजबूत करना है। ड्रेस तय करते समय प्रदेश की जलवायु और शिक्षकों की व्यावसायिक जरूरतों का भी ध्यान रखा गया है।

महिला शिक्षकों के लिए साड़ी के साथ ब्लेजर, कुर्ता-कमीज के साथ पैंट, प्लाजो या सलवार और टाई-शर्ट और ब्लेजर के साथ ट्राउजर का विकल्प रखा गया है। पुरुष शिक्षक शर्ट, ट्राउजर, टाई और ब्लेजर पहनेंगे। ड्रेस के लिए हल्का लाइलैक, लाइलैक पर्पल और नेवी ब्लू रंग निर्धारित किए गए हैं।

जूते व अन्य निर्धारित एक्सेसरीज काले रंग की होंगी। ड्यूटी के दौरान पहचान पत्र पहनना अनिवार्य होगा और ब्लेजर पर स्कूल या विभाग का लोगो लगाया जाएगा। ड्रेस कोड नियमित शिक्षकों के साथ आउटसोर्स शिक्षकों और प्रधानाचार्यों पर भी लागू होगा।

चिकित्सकीय आवश्यकता, दिव्यांगता या गर्भावस्था की स्थिति में संस्थान प्रमुख की अनुमति से आवश्यक छूट दी जा सकेगी। सरकार के अनुसार, सीबीएसई स्कूलों में करीब 2,000 शिक्षण पद भरे जा चुके हैं। शिक्षकों की उपस्थिति और जवाबदेही मजबूत करने के लिए दिन में तीन बार उपस्थिति दर्ज करने की व्यवस्था भी शुरू की जा रही है।